लखनऊ :
क्रिप्टोकरेंसी (USDT) के नाम पर ₹93 लाख की ठगी करने वाली महिला समेत तीन शातिर गिरफ्तार, फर्जी RBI-SEBI लेटर से जमाया भरोसा।
दो टूक : डिजिटल करेंसी USDT/क्रिप्टोकरेंसी में मोटे मुनाफे और 2 से 3 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर लोगों से करोड़ों की रकम ऐंठने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का विभूतिखंड पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह की एक महिला समेत तीन आरोपियों को होटल दयाल गेटवे के कमरा नंबर 509 से गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर दो लोगों से कुल 93 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप है।
विस्तार :
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पीड़ितों को विश्वास में लेने के लिए RBI और SEBI के नाम से कूटरचित अथॉरिटी लेटर तक तैयार कर रखे थे। फर्जी दस्तावेज दिखाकर डिजिटल करेंसी उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया गया और रकम मिलने के बाद उसे हड़प लिया गया।
दो पीड़ितो से 93 लाख की थी ठगी।
विभूतिखंड थाने में अखिलेश त्रिपाठी ने शिकायत दर्ज कराई कि USDT उपलब्ध कराने के नाम पर आरोपियों ने उनसे 43 लाख रुपये हड़प लिए और भरोसा कायम करने के लिए फर्जी RBI अथॉरिटी लेटर दिया।
इसी तरह अंजनी कुमार से भी USDT उपलब्ध कराने के नाम पर 50 लाख रुपये की ठगी की गई। दोनों मामलों में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। इस तरह अब तक सामने आई ठगी की रकम 93 लाख रुपये है।
गिरोह ने फर्जी RBI-SEBI दस्तावेज बना हथियार।
पूछताछ में पुलिस के अनुसार आरोपियों ने लोगों को डिजिटल करेंसी उपलब्ध कराने के नाम पर 2 से 3 प्रतिशत कमीशन का लालच दिया। इसके बाद फर्जी RBI और SEBI अथॉरिटी लेटर दिखाकर अपनी गतिविधि को वैध साबित करने की कोशिश की जाती थी। रकम हासिल करने के बाद उसे हड़प लिया जाता था।
होटल के कमरे से दबोचा गया गिरोह।
पुलिस टीम लगातार तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर तंत्र और सुरागरसी-पतारसी के जरिए आरोपियों तक पहुंचने में जुटी थी। शुक्रवार 4 सितंबर 2026 की सुबह करीब 6:15 बजे मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने वादीगण को साथ लेकर होटल दयाल गेटवे के कमरा नंबर 509 में दबिश दी और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान फरीदा सिकन्दर सौदागर (51), पवन बिष्ट (54) और अवधेश कुमार मिश्रा (68) के रूप में हुई है। इनमें फरीदा महाराष्ट्र के ठाणे की रहने वाली है, जबकि पवन बिष्ट दिल्ली और मूल रूप से अल्मोड़ा तथा अवधेश कुमार मिश्रा लखनऊ निवासी है।
लैपटॉप से लेकर फर्जी अथॉरिटी लेटर तक बरामद।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एप्पल का लैपटॉप, तीन एंड्रॉइड मोबाइल फोन, RBI और SEBI के नाम से 12 कूटरचित अथॉरिटी लेटर, तीन चेकबुक, दो पासबुक, दो पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार कार्ड, तीन एटीएम/डेबिट कार्ड और एक मोहर बरामद की है। बरामद मोहर पर “FOR MPS INFORMATICS PRIVATE LIMITED” अंकित है। पुलिस अब बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच के जरिए गिरोह के नेटवर्क और अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है।
दोनों मुकदमों में बढ़ी गैंग की भूमिका की धारा।
विभूतिखंड थाने में दर्ज दोनों मुकदमों में पहले धारा 318(4), 338, 336(3) और 340(2) बीएनएस के तहत कार्रवाई की गई थी। गिरफ्तारी और बरामदगी के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों मामलों में धारा 3(5) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई है।
पुलिस की कार्रवाई से साफ है कि डिजिटल करेंसी के नाम पर फर्जी नियामकीय दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोगों को भरोसे में लेने वाला यह नेटवर्क सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं हो सकता। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, बैंक खातों और ठगी की रकम के लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है।
