लखनऊ :
रिकवरी एजेंटों ने PGI अस्पताल पहुंचे परिवार से छीनी कार,सोशल मीडिया वायरल।।
दो टूक : राजधानी लखनऊ मे दिन प्रतिदिन रिकवरी एजेंटों का आतंक बढता जा रहा है। एक के बाद एक चौका देने वाली घटनाएं सामने आ रही है अभी थाना निगोहां क्षेत्र का मामला शांत नही हुआ कि थाना पीजीआई क्षेत्र मे रिकवरी एजेंटों ने
PGI अस्पताल इलाज कराने आए परिवार से असलहे की नोक पर कार छीनकर
पत्नी-बच्चे को जान से मारने की धमकी देते हुए कार लेकर फरार हो गए। मामला इण्टरनेट मीडिया वायरल होने लगा। सोशल मीडिया को संज्ञान लेते हुए पीजीआई पुलिस हरकत मे आयी और मामले की छानबीन शुरु कर दी।
विस्तार :
सोशल मीडिया के अनुसार लखनऊ खदरा निवासी जुबैर अजमी अपनी पत्नी और पांच वर्षीय बच्चे के साथ कार संख्या UP32 ND 2323 से PGI अस्पताल बच्चे का इलाज कराने पहुंचे थे। आरोप है कि इसी दौरान रिकवरी एजेंटों ने असलहा दिखाकर उनकी कार रुकवा ली।
जुबैर के मुताबिक, रिकवरी एजेंटों ने उनकी पत्नी और मासूम बच्चे को डराते-धमकाते हुए कार से नीचे उतार दिया और जबरन कार अपने कब्जे में ले ली। जुबैर ने इलाज के लिए कार में रखे 62 हजार रुपये निकालने देने की गुहार लगाई, लेकिन आरोप है कि रिकवरी एजेंटों ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी और रुपये निकालने का मौका दिए बिना कार लेकर चले गए।
घटना ने रिकवरी एजेंटों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि वाहन की रिकवरी के नाम पर नियम-कानून को ताक पर रखकर लोगों को भयभीत किया जा रहा है।
थाना पीजीआई इस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह ने बताया कि इससे सम्बंधित थाने पर कोई पीडित नही आया और न ही सूचना दी। सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी हुई छानबीन करने तथ्य सामने आया कि - टाटा कैप्टल फाइनेश कम्पनी से कार फाइनेंश कराए थे कम्पनी का 7 लाख 74 हजार रुपए की किस्त बकाया थी। किस्त वसूली करने वाली एजेंसी के एजेंटों ने कार ले लिया था दोनो पक्षों मे समझौता होने के बाद देर शाम कार वापस कर दिया।
दो दिन पहले भी सामने आया था प्रताड़ना का मामला।
गौरतलब है कि इससे पहले निगोहां क्षेत्र में भी एक रिकवरी एजेंट पर मजदूर को बंधक बनाकर प्रताड़ित करने और खून निकलवाने का गंभीर आरोप सामने आया था। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से रिकवरी एजेंटों की कथित मनमानी और दबंगई को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
