लखनऊ :
आउटसोर्स परिचालकों को अब सीधे परिवहन निगम से मिलेगा अनुबंध
पहले चरण में वर्तमान में कार्यरत परिचालकों को मिलेगा मौका।
दो टूक : उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में आउटसोर्स के आधार पर कार्यरत परिचालकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। परिवहन निगम अब आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत परिचालकों को चरणबद्ध तरीके से सीधे निगम से अनुबंध के आधार पर संविदा परिचालक के रूप में रखने की प्रक्रिया शुरू करेगा। प्रथम चरण में वर्तमान में आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत परिचालकों को ही इसका लाभ दिया जाएगा। इसके लिए सेवायोजन पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।परिवहन निगम की यह व्यवस्था आउटसोर्स परिचालकों के लिए सीधे निगम से अनुबंध का रास्ता खोलने वाली है। हालांकि इसका लाभ उन्हीं परिचालकों को मिलेगा जो निर्धारित पात्रता और शर्तों को पूरा करेंगे।
विस्तार :
परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि सीधे अनुबंध के लिए पात्र परिचालकों को परिवहन निगम में नवीन प्रतिभूति राशि (सिक्योरिटी मनी) जमा करनी होगी। हालांकि, आउटसोर्स के रूप में पूर्व में की गई सेवा अवधि का कोई लाभ सीधे अनुबंध में नहीं दिया जाएगा। अनुबंध पर रखे जाने के बाद परिचालकों को निगम में प्रचलित अन्य अनुमन्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।
कदाचार या भ्रष्टाचार में हटाए गए परिचालक दायरे से बाहर।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे परिचालक जो कदाचार, भ्रष्टाचार अथवा अन्य किसी कारण से एजेंसी को वापस किए जा चुके हैं, उन्हें इस व्यवस्था का लाभ नहीं मिलेगा। सीधे अनुबंध पर वही आउटसोर्स परिचालक लिए जाएंगे जो वर्तमान में कार्यरत हैं और निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं।
1 नवंबर से शुरू होगी नई व्यवस्था।
परिवहन निगम के अनुसार जिन सेवा प्रदाताओं की अनुबंध अवधि 31 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो रही है, उनके माध्यम से कार्यरत पात्र आउटसोर्स परिचालकों से 1 नवंबर 2026 से संविदा परिचालक के रूप में संचालन कार्य लिया जाएगा। इसी तरह जिन सेवा प्रदाताओं की अनुबंध अवधि 31 जनवरी 2027 को समाप्त हो रही है, उनके माध्यम से कार्यरत परिचालकों से 1 फरवरी 2027 से संविदा परिचालक के रूप में कार्य लिया जाएगा।
वेतन से लेकर ईपीएफ-ईएसआई तक का भुगतान अनिवार्य।
परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक प्रभु एन. सिंह ने बताया कि परिवहन मंत्री के प्रयासों से आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे परिवहन निगम से अनुबंध पर रखे जाने का रास्ता साफ हुआ है। इस संबंध में सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को आवश्यक कार्यवाही समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
समायोजित होने वाले आउटसोर्स परिचालकों के वेतन, ईपीएफ, ईएसआई, जीएसटी समेत सभी वैधानिक देयकों का निर्धारित समय सीमा में पूरा भुगतान कराया जाएगा। इसके बाद उनकी प्रतिभूति राशि वापस कर एनओसी ली जाएगी और दोनों कार्यवाहियां पूरी होने के बाद अदेयता प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इसके पश्चात सक्षम स्तर से सेवा प्रदाता की जमा परफॉर्मेंस सिक्योरिटी, बैंक गारंटी अथवा एफडीआर वापस करने की कार्यवाही की जाएगी।
शपथ पत्र देना भी होगा जरूरी।
सीधे अनुबंध पर समायोजित किए जाने वाले आउटसोर्स परिचालकों को शपथ पत्र भी देना होगा कि आउटसोर्स अवधि से संबंधित किसी भी प्रकार का वैधानिक देयक शेष नहीं है। यानी नई व्यवस्था में शामिल होने से पहले पुराने आउटसोर्स कार्यकाल से जुड़े भुगतान और वैधानिक दायित्वों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा।
