लखनऊ :
मथुरा के लड्डू गोपाल को काशी विश्वनाथ धाम से भेजा गया जन्माष्टमी का उपहार, देवी-देवताओं के शुभकामना संदेश भी प्रेषित।
दो टूक : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर काशी और मथुरा के बीच आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की अनूठी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री काशी विश्वनाथ धाम की ओर से श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मथुरा में विराजमान श्री लड्डू गोपाल के लिए विशेष उपहार भेजा गया। इसके साथ ही देश-विदेश के 260 प्राण-प्रतिष्ठित देवी-देवताओं की ओर से शुभकामना संदेश भी श्रीकृष्ण जन्मस्थान को प्रेषित किए गए हैं।
विस्तार :
श्री लड्डू गोपाल के लिए तैयार विशेष उपहार सामग्री को 02 सितंबर को भगवान श्री विश्वेश्वर महादेव के समक्ष विधिवत पूजन-अर्चन के बाद अर्पित किया गया। इसके बाद आज 03 सितंबर को यह पावन भेंट श्रद्धापूर्वक मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान के लिए रवाना की गई।
2024 में शुरू हुई थी परंपरा:
काशी और मथुरा के बीच इस धार्मिक-सांस्कृतिक आदान-प्रदान की शुरुआत वर्ष 2024 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर हुई थी। तब श्री काशी विश्वनाथ धाम की ओर से भगवान श्री विश्वनाथ के माध्यम से मथुरा के श्री लड्डू गोपाल को उपहार भेजा गया था। इसके बाद रंगभरी एकादशी पर काशी विश्वनाथ महादेव की ओर से लड्डू गोपाल को और मथुरा से भगवान लड्डू गोपाल की ओर से श्री विश्वेश्वर महादेव को भेंट अर्पित की गई थी।
देवी-देवताओं के संदेश बने विशेष आकर्षण:
इस वर्ष अभियान को और व्यापक स्वरूप देते हुए देश-विदेश के विभिन्न देवालयों एवं तीर्थस्थलों में प्राण-प्रतिष्ठित 260 देवी-देवताओं के शुभकामना संदेश भी मथुरा भेजे गए हैं। आयोजकों के अनुसार, यह संदेश सनातन परंपरा की व्यापकता और विभिन्न तीर्थस्थलों के बीच आध्यात्मिक एकात्मता का प्रतीक हैं।
Temple Connect के सहयोग से अभियान:
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने अपने संस्थागत नॉलेज पार्टनर ‘Temple Connect’ के सहयोग से इस विशेष अभियान को संचालित किया। इसका उद्देश्य देश-विदेश के प्रमुख देवालयों और तीर्थस्थलों को एक आध्यात्मिक सूत्र में जोड़ना तथा सनातन संस्कृति में संवाद, सहभागिता और परस्पर श्रद्धा को मजबूत करना है।
काशी-मथुरा के आध्यात्मिक संबंधों को नई मजबूती:
श्रीकृष्ण और भगवान शिव सनातन परंपरा के प्रमुख आराध्य स्वरूप हैं। काशी और मथुरा के बीच उपहार एवं शुभकामना संदेशों के इस आदान-प्रदान को धार्मिक सौहार्द, सांस्कृतिक समरसता और सनातन तीर्थ परंपरा को मजबूती देने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है। दोनों पावन नगरियाँ इस पहल के माध्यम से श्रद्धालुओं को एकत्व, सहभक्ति और सांस्कृतिक समरसता का संदेश दे रही हैं।
