लखनऊ :
KSSSCI और AIIMS रायबरेली में करार, कैंसर उपचार-शोध को मिलेगी नई रफ्तार।
।।डी एस शास्त्री।।
दो टूक : कैंसर के बेहतर उपचार, शीघ्र निदान, अत्याधुनिक तकनीक और शोध को बढ़ावा देने के लिए कल्याण सिंह अति विशिष्ट कैंसर संस्थान (KSSSCI), लखनऊ और AIIMS रायबरेली के बीच शनिवार को महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर एवं आदान-प्रदान किया गया।
इस समझौते के बाद दोनों संस्थान कैंसर के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान, नई तकनीकों के विकास, विशेषज्ञों एवं संकाय सदस्यों के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर मिलकर काम करेंगे। साझेदारी का मुख्य उद्देश्य कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान और मरीजों को बेहतर एवं उन्नत उपचार उपलब्ध कराना है।
विस्तार :
कल्याण सिंह अति विशिष्ट कैंसर संस्थान (KSSSCI) के चिकित्सा अधीक्षक
डा०वरुण विजय ने बताया कि कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान और मरीजों को बेहतर एवं उन्नत इलाज के लिए शनिवार को MoU पर KSSSCI के निदेशक प्रो. मदन लाल ब्रह्मा भट्ट और AIIMS रायबरेली की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. अमिता जैन ने हस्ताक्षर किए। दोनों संस्थानों के बीच यह समझौता ऑन्कोलॉजी और उससे जुड़ी चिकित्सा विशेषज्ञताओं में शिक्षण, प्रशिक्षण, अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
समझौते के तहत संयुक्त शोध परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। कैंसर की शीघ्र पहचान, बेहतर निदान और उपचार के लिए अत्याधुनिक एवं नवीन तकनीकों के विकास और उपयोग पर भी काम होगा। इसके साथ ही वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों के बीच विशेषज्ञता एवं ज्ञान का आदान-प्रदान किया जाएगा।
दोनों संस्थान कैंसर मरीजों के लिए तृतीयक स्तर की चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने तथा नवीन उपचारात्मक हस्तक्षेप विकसित करने की दिशा में भी सहयोग करेंगे। संयुक्त सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए कैंसर की रोकथाम और जागरूकता को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
इस अवसर पर KSSSCI की ओर से मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वरुण विजय, वित्त अधिकारी उपेंद्र तिवारी, डॉ. एस. प्रिया, सीनियर रिसर्च ऑफिसर सुरेंद्र श्रीवास्तव तथा AIIMS रायबरेली की ओर से लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) गौरव त्रिवेदी मौजूद रहे।
यह समझौता उत्तर प्रदेश में कैंसर की रोकथाम से लेकर शीघ्र निदान, उन्नत उपचार, अनुसंधान और प्रशिक्षण तक स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
