लखनऊ :
स्मार्टफोन की कीमतों में भारी उछाल, आम आदमी से मोबाइल दूर,GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग।
मोबाइल हुआ महंगा तो पुराने फोन से काम चला रहे लोग, रिपेयरिंग बाजार में बढ़ी रौनक।
।।डी एस शास्त्री।।
दो टूक: मोबाइल फोन अब सिर्फ बातचीत का साधन नहीं, बल्कि पढ़ाई, रोजगार, बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान और सरकारी सेवाओं तक पहुंच की बुनियादी जरूरत बन चुका है। लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ता के लिए नया स्मार्टफोन खरीदना मुश्किल ही नामुमकिन कर दिया है। महंगे होते मोबाइल बाजार का असर अब बाजार मे भी साफ दिखाई देने लगा है लोग नया फोन खरीदने के बजाय पुराने मोबाइल की रिपेयरिंग कराकर काम चलाने को मजबूर हैं।
विस्तार :
बढ़ती मंहगाई ने आम नागरिक को परेशान कर के रखा है खाने मे नमक की तरह जीवन मे जरुरी स्मार्टफोन की कीमतों में भारी उछाल से आम आदमी परेशान हो गया और दुकान दार किंकर्तव्यविमूढ़ होकर मोबाइल पर GST 18% से घटाकर 5% की मांग करने लगा।
बाजार से सामने आ रहे आंकड़े भी इसी बदलती तस्वीर की ओर इशारा कर रहे हैं। वर्ष 2026 की अप्रैल-जून तिमाही में देश में स्मार्टफोन शिपमेंट में करीब 10 से 11 प्रतिशत की सालाना गिरावट बताई जा रही है, जबकि दूसरी ओर रीफर्बिश्ड स्मार्टफोन के बाजार में करीब 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यानी नई डिवाइस खरीदने के बजाय उपभोक्ता पुराने फोन को ही बेहतर कराकर इस्तेमाल करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
60 प्रतिशत तक बढ़ी कीमतें, साल के अंत तक और महंगा होने की आशंका
ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) के फाउंडर चेयरमैन कैलाश लख्यानी के हवाले से बताया गया है कि बाजार में एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स की कीमतों में औसतन 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। आशंका जताई जा रही है कि साल के अंत तक यह वृद्धि और बढ़ सकती है।
ऐसे में मोबाइल पर लागू मौजूदा 18 प्रतिशत GST को घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने की मांग तेज हो गई है। कारोबारियों का कहना है कि टैक्स में कमी का सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिले तो महंगे मोबाइल से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
'मोबाइल विलासिता नहीं, आज की बुनियादी जरूरत'।
मोबाइल टेलीकम्युनिकेशन ट्रेडर्स एसोसिएशन (JMTTA) एवं सेंट्रल इन्फो टेलीकॉम ट्रेडर्स एसोसिएशन (CITTA) के अध्यक्ष दीपक सेठी ने कहा कि डिजिटल इंडिया के दौर में मोबाइल फोन अब विलासिता की वस्तु नहीं रह गया है। यह शिक्षा, व्यापार, डिजिटल भुगतान और रोजमर्रा की आवश्यक सेवाओं का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
उन्होंने कहा कि जब मोबाइल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और ग्राहक नया फोन खरीदने के बजाय पुराने फोन की मरम्मत को प्राथमिकता देने लगे हैं, तो यह बाजार की गंभीर स्थिति का संकेत है। सरकार और GST काउंसिल को इसे केवल टैक्स में कमी के रूप में नहीं, बल्कि करोड़ों उपभोक्ताओं और लाखों मोबाइल कारोबारियों को राहत देने वाले फैसले के तौर पर देखना चाहिए।
13 फीसदी टैक्स राहत से ग्राहक को मिले सीधा फायदा।
दीपक सेठी के मुताबिक मोबाइल पर GST को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाता है तो टैक्स में 13 प्रतिशत की सीधी कमी होगी। इसका वास्तविक लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचना जरूरी है। इससे महंगे स्मार्टफोन खरीदने से पीछे हट रहे ग्राहकों को राहत मिलने के साथ ही सुस्त पड़े मोबाइल रिटेल बाजार में मांग बढ़ने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि यदि लोग नए मोबाइल खरीदने के बजाय पुराने फोन की रिपेयरिंग कराने को मजबूर हो रहे हैं तो यह केंद्र सरकार, नीति-निर्माताओं और मोबाइल निर्माता कंपनियों के लिए भी स्पष्ट संकेत है।
जनहित में सरकार से फैसला लेने की अपील।
मोबाइल कारोबारियों ने आगामी GST Council की बैठक में मोबाइल फोन पर GST दर को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि मोबाइल अब आम आदमी की जरूरत है, इसलिए इसे महंगी वस्तु की श्रेणी में रखकर भारी टैक्स का बोझ डालना उपभोक्ताओं के हित में नहीं है।
दो टूक: मोबाइल की बढ़ती कीमतों ने जहां ग्राहकों का बजट बिगाड़ दिया है, वहीं इसका असर रिटेल कारोबार पर भी पड़ रहा है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती सिर्फ मोबाइल सस्ता करने की नहीं, बल्कि डिजिटल जरूरतों से जुड़े करोड़ों लोगों को राहत देने की भी है। अब निगाहें GST काउंसिल के आगामी फैसले पर टिकी हैं।
