लखनऊ :
कानून के रखवाले दरोगा पर फर्जी कोर्ट सम्मन से महिला को धमकाने मामले FIR हुई दर्ज।।
दरोगा पर फर्जी अदालत का सम्मन बनाकर महिला को धमकाने का आरोप।
दो टूक : राजधानी लखनऊ में कानून के रखवाले रहे एक रिटायर्ड पुलिस उपनिरीक्षक पर अब कानून और न्यायालय की मुहर से खिलवाड़ करने के गंभीर आरोप लगे हैं। बंथरा क्षेत्र की महिला ने जनमेजय सचान नामक रिटायर्ड SI पर पहले छेड़छाड़ और धमकी देने का आरोप लगाया, इसके बाद न्यायालय में विचाराधीन मामले को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर फर्जी न्यायालय की मोहर, कूटरचित हस्ताक्षर और फर्जी सम्मन तैयार कर पुलिस के जरिए महिला तक पहुंचाने का आरोप लगाया है। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
विस्तार :
थाना बन्थरा इलाके के गढ़ी चुनौटी निवासी पीड़िता महिला अनीता के आरोपों के मुताबिक 05 जून 2024 को आरोपी दरोगा जनमेजय सचान मानस नगर कृष्णा नगर लखनऊ ने उसके साथ जबरन अभद्रता और छेड़छाड़ करने और विरोध करने पर गाली-गलौज करते हुए मुकदमा वापस लेने की धमकी देकर चले गए। स्थानीय पुलिस से कार्रवाई न होने पर महिला ने न्यायालय की शरण ली और मामला विचाराधीन हो गया।
पीड़िता का आरोप है कि यहीं से शुरू हुआ फर्जी सम्मन का खेल। महिला के मुताबिक न्यायालय से नोटिस मिलने के बाद आरोपी ने कथित रूप से विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सोनभद्र, मिर्जापुर और कुशीनगर से संबंधित फर्जी मोहरें तैयार कराईं और कूटरचित न्यायालयी सम्मन पर कथित फर्जी हस्ताक्षर व मुहर लगाकर उसे पुलिस आयुक्त कार्यालय तक पहुंचा दिया। इसके बाद डाक रजिस्टर में दर्ज कर थाना बंथरा पुलिस के माध्यम से महिला को सम्मन तामील कराया गया।
महिला का दावा है कि मूल लिफाफे के बारकोड की जांच कराने पर उसे सम्मन की कथित हकीकत का पता चला। उसने आरोप लगाया कि न्यायालय की मुद्रा और मोहर का कथित दुरुपयोग कर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और लंबित मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया गया।
पीड़िता ने आरोपी पर लगातार जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। उसका कहना है कि उसे भय है कि आरोपी उसके साथ कभी भी अप्रिय घटना कर सकता है। महिला के अनुसार उसने पहले स्थानीय थाने और बाद में 21 अगस्त 2025 को पुलिस आयुक्त लखनऊ को डाक से शिकायत भेजी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
अब न्यायालय के निर्देश पर बंथरा पुलिस ने मामला दर्ज कर मामले की छानबीन शुरु कर दी है। पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल कथित फर्जी सम्मन की असलियत, उसमें इस्तेमाल मोहर और हस्ताक्षर, उसे तैयार कराने वाले व्यक्ति तथा पुलिस कार्यालय तक पहुंचने की पूरी कड़ी का पता लगाना एक चुनौती है।
