शनिवार, 26 सितंबर 2026

गौतमबुद्धनगर: इलेक्ट्रॉनिक्स से एआई और सेमीकंडक्टर तक, टेक्नोलॉजी की नई उड़ान भरेगा यूपी: जितिन प्रसाद

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गौतमबुद्धनगर: इलेक्ट्रॉनिक्स से एआई और सेमीकंडक्टर तक, टेक्नोलॉजी की नई उड़ान भरेगा यूपी: जितिन प्रसाद

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

केंद्रीय मंत्री बोले- उत्तर प्रदेश बनेगा देश का अगला ग्रोथ इंजन, नोएडा से आगे पूरे प्रदेश में फैलेगा टेक्नोलॉजी और निवेश का नेटवर्क

डिजाइन से मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर, लखनऊ-कानपुर में भी बढ़ेगा GCC का विस्तार

दो टूक//ग्रेटर नोएडा, 26 सितंबर। उत्तर प्रदेश अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में देश का प्रमुख टेक्नोलॉजी हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश आने वाले समय में देश के अगले ग्रोथ इंजन के रूप में अपनी मजबूत पहचान बनाने की क्षमता रखता है। यह बात केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने ग्रेटर नोएडा में आयोजित ‘यूपीज जर्नी फ्रॉम इलेक्ट्रॉनिक्स लीडर टू एआई एंड सेमीकंडक्टर पावरहाउस’ सत्र को संबोधित करते हुए कही।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह दिन दूर नहीं, जब देश और दुनिया में निवेश की संभावनाओं की चर्चा होगी तो उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य प्रदेश को टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, रिसर्च और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र बनाना है। इसके लिए राज्य में जरूरी औद्योगिक और तकनीकी इकोसिस्टम तेजी से तैयार किया जा रहा है।

डबल इंजन सरकार के समन्वय से तेज हो रहा बदलाव

जितिन प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकार के बेहतर समन्वय से निवेश, उद्योग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विकास की गति तेज हुई है।

उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी और ट्रेड देश की विकास यात्रा के दो महत्वपूर्ण इंजन हैं। उत्तर प्रदेश के पास विशाल बाजार, युवा प्रतिभा, बेहतर कनेक्टिविटी और बढ़ता औद्योगिक आधार है। इन क्षमताओं को टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग से जोड़कर प्रदेश नई ऊंचाइयों को हासिल कर सकता है।

नोएडा तक सीमित नहीं रहेगा टेक्नोलॉजी का विस्तार

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब प्रयास केवल नोएडा और एनसीआर तक निवेश सीमित रखने का नहीं है। उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और टेक्नोलॉजी से जुड़े निवेश और रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे। इसका सीधा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सैमसंग और योटा जैसे बड़े निवेश, डाटा सेंटर, एआई लैब्स और अन्य टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदेश में तैयार हो रहे नए इकोसिस्टम की तस्वीर पेश करते हैं। सरकार का प्रयास है कि उत्तर प्रदेश में डिजाइन से लेकर सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट तक पूरी वैल्यू चेन विकसित हो।

असेंबली से कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ेगा यूपी

जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत अब केवल उत्पादों की असेंबली करने वाला देश नहीं रहेगा। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम जैसी पहल के जरिए देश कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और उत्तर प्रदेश इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत की डिजाइन क्षमता और प्रतिभा को दुनिया पहले से पहचानती है। अब जरूरत इस क्षमता को मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम से जोड़ने की है। उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्माण कर उन्हें घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजार तक पहुंचाना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

सरकारी प्रोत्साहन का लाभ लें, लेकिन आत्मनिर्भर बनें उद्योग

केंद्रीय मंत्री ने उद्योग जगत को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सरकारी प्रोत्साहन और सब्सिडी उद्योगों के विकास को गति देने का माध्यम हैं, लेकिन किसी भी उद्योग की दीर्घकालिक सफलता उसकी अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर निर्भर करती है।

उन्होंने कहा कि सरकार जमीन, नीतियां, मंजूरियां और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उद्योगों को अंततः कॉम्पिटिटिव और सेल्फ-सस्टेनिंग बनना होगा। निवेशकों को सुरक्षित, स्थिर और भरोसेमंद नीतिगत वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, जिससे उद्योग लंबी अवधि के निवेश संबंधी फैसले ले सकें।

एआई से बढ़ेगी एमएसएमई की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा

जितिन प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एआई का इस्तेमाल केवल नई तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका वास्तविक उद्देश्य प्रोडक्टिविटी, एफिशिएंसी और कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि एआई के इस्तेमाल से कोई एमएसएमई अपनी लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने या काम की गुणवत्ता सुधारने में सफल होता है, तो यही तकनीक का वास्तविक लाभ है। उन्होंने प्रदेश के युवाओं को एआई इनोवेटर्स, रिसर्चर्स और टेक्नोलॉजी एडॉप्टर्स के रूप में तैयार करने पर जोर दिया।

साथ ही उन्होंने आईआईटी कानपुर समेत प्रदेश के शोध संस्थानों और उद्योग जगत के बीच मजबूत तालमेल विकसित करने की जरूरत बताई, ताकि रिसर्च और इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच बेहतर कनेक्शन बनाया जा सके।

आज की तैयारी से तय होगा यूपी का तकनीकी भविष्य

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लिए यह अवसर का महत्वपूर्ण दौर है। आने वाले वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आज से ही योजनाएं और इकोसिस्टम तैयार करने होंगे। ऐसा वातावरण बनाना होगा, जिसमें प्रदेश के युवाओं को रोजगार के साथ-साथ रिसर्च, इनोवेशन और उद्यमिता के अवसर भी मिलें।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को ऐसा टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है, जो देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ वैश्विक निवेश और उत्पादन के नक्शे पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित करे।

 नोएडा के साथ लखनऊ और कानपुर में भी बढ़ेगा GCC का विस्तार: आलोक कुमार

उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स आलोक कुमार ने कहा कि प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास के साथ मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि नोएडा में पहले से कई जीसीसी काम कर रहे हैं, जबकि कुछ जीसीसी ने लखनऊ में भी अपनी गतिविधियां शुरू कर दी हैं। नई जीसीसी पॉलिसी और आईटी पॉलिसी के माध्यम से अब नोएडा के साथ लखनऊ और कानपुर क्षेत्र में भी अधिक जीसीसी आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

आलोक कुमार ने बताया कि लखनऊ में आईबीएम समेत कई आईटी और टेक्नोलॉजी कंपनियां पहले से मौजूद हैं। राज्य की जीसीसी और आईटी नीतियों को अन्य राज्यों की नीतियों के अनुरूप मजबूत किया गया है। इसके अलावा आईटी और आईटी इनेबल्ड सर्विसेज (आईटीईएस) को पहले ही इंडस्ट्री स्टेटस प्रदान किया जा चुका है। इससे प्रदेश में टेक्नोलॉजी आधारित निवेश और रोजगार के नए अवसरों को गति मिलने की उम्मीद है।।