हरिद्वार: निठारी कांड की लंबी कहानी का एक और अध्याय खत्म, सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत!!
दो टूक//हरिद्वार। नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड से जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत की खबर सामने आने के बाद करीब दो दशक पुराने इस चर्चित मामले की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। शुक्रवार को उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने स्थित उसकी चाय की दुकान पर सुरेंद्र कोली का शव मिला। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मानकर जांच कर रही है। मौके से किसी सुसाइड नोट के मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है।
बताया जा रहा है कि सुरेंद्र कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था और भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान चलाकर अपना जीवन यापन कर रहा था। शुक्रवार को दुकान पर उसका शव मिलने की सूचना से आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटना की जानकारी उसके अल्मोड़ा निवासी स्वजनों को भी दे दी है।
रिहाई के बाद हरिद्वार में रह रहा था सुरेंद्र कोली
निठारी कांड से जुड़े मामलों में लंबे समय तक जेल में रहने और विभिन्न अदालतों में चली कानूनी प्रक्रिया के बाद सुरेंद्र कोली जेल से बाहर आया था। इसके बाद वह हरिद्वार में रहने लगा और यहां चाय की दुकान संचालित कर रहा था। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों से वह भूपतवाला क्षेत्र में ही रह रहा था।
उसकी मौत की खबर सामने आने के बाद पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटाई। पुलिस मौत की परिस्थितियों और उससे जुड़े तमाम पहलुओं की जांच कर रही है।
पहले मिली थी फांसी की सजा, बाद में कई मामलों में हुआ बरी
वर्ष 2006 में नोएडा के निठारी क्षेत्र से सामने आए घटनाक्रम ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले में सुरेंद्र कोली और मनिंदर सिंह पंढेर के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए थे। सुरेंद्र कोली को निचली अदालत से कई मामलों में दोषी ठहराया गया और कुछ मामलों में उसे मृत्युदंड तक की सजा सुनाई गई थी।
बाद में मामला उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अलग-अलग मामलों में अदालतों के फैसलों के बाद कोली को कई मामलों में दोषमुक्त किया गया और उसकी सजा को लेकर भी कानूनी स्थिति लगातार बदलती रही।
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लंबित मामले में भी किया था बरी
सुरेंद्र कोली की कानूनी स्थिति को लेकर नवंबर 2025 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद महत्वपूर्ण रहा। 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उसकी क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए निठारी कांड से जुड़े अंतिम लंबित मामले में उसकी दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया था।
इस फैसले के बाद सुरेंद्र कोली के खिलाफ निठारी कांड से संबंधित अंतिम लंबित दोषसिद्धि भी समाप्त हो गई थी। इसलिए उसकी वर्तमान स्थिति को देखते हुए उसे निठारी कांड का दोषी कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। उसे निठारी कांड से जुड़े मामलों में आरोपी रहे व्यक्ति के रूप में संदर्भित करना अधिक उचित है।
करीब दो दशक बाद फिर सुर्खियों में आया निठारी कांड
सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत की खबर सामने आने के बाद नोएडा का निठारी कांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वर्ष 2006 में सामने आए इस मामले ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, पुलिस जांच तथा आपराधिक न्याय व्यवस्था को लेकर देशभर में व्यापक चर्चा पैदा की थी।
इस मामले में करीब दो दशक तक अलग-अलग अदालतों में कानूनी प्रक्रिया चलती रही। विभिन्न मुकदमों में अलग-अलग स्तर पर फैसले सामने आए और अंततः सुरेंद्र कोली के खिलाफ अंतिम लंबित मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी थी।
पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल हरिद्वार पुलिस मामले की जांच कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। प्रारंभिक रिपोर्टों में आत्महत्या की बात सामने आई है, लेकिन मौत की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
सुरेंद्र कोली की मौत के साथ ही निठारी कांड से जुड़ी करीब दो दशक लंबी कानूनी कहानी का एक और अध्याय सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद हरिद्वार में सामान्य जीवन जी रहे कोली की अचानक मौत ने इस पुराने और चर्चित मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।।
