गुरुवार, 10 सितंबर 2026

गौतमबुद्धनगर: इलाहाबास में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, दो ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप; निष्पक्ष जांच की मांग!!

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गौतमबुद्धनगर: इलाहाबास में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, दो ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप; निष्पक्ष जांच की मांग!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

नोएडा मीडिया क्लब में प्रेस वार्ता कर शिकायतकर्ताओं ने रजिस्ट्री, हिस्सेदारी और कब्जे को लेकर उठाए सवाल, प्रशासन से दस्तावेजों की जांच कराने की अपील

दो टूक//नोएडा। इलाहाबास गांव में जमीन की हिस्सेदारी, रजिस्ट्री और कब्जे को लेकर चल रहा विवाद अब सार्वजनिक मंच तक पहुंच गया है। सेक्टर-29 स्थित नोएडा मीडिया क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में दो ग्रामीणों ने रवि प्रधान पर जमीन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कई खसरा नंबरों में निर्धारित हिस्सेदारी से अधिक जमीन की बिक्री और रजिस्ट्री की गई तथा कुछ मामलों में कब्जे को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ है। दोनों ग्रामीणों ने प्रशासन से राजस्व अभिलेखों, रजिस्ट्री दस्तावेजों और मौके की स्थिति की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की।

नागेंद्र खारी ने कई खसरा नंबरों में हिस्सेदारी को लेकर उठाए सवाल

इलाहाबास गांव निवासी नागेंद्र खारी ने प्रेस वार्ता में बताया कि कई खसरा नंबरों में उनकी और रवि प्रधान की हिस्सेदारी है। उनका आरोप है कि रवि प्रधान ने अपने हिस्से से अधिक जमीन बेच दी और विवादित भूमि में उनके हिस्से की जमीन भी शामिल कर दी गई।

नागेंद्र खारी के मुताबिक, वह इस मामले को लेकर नोएडा प्राधिकरण और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष कई बार शिकायत कर चुके हैं। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद अभी तक उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है।

खसरा नंबर 122 में ढाई बीघा हिस्सेदारी का दावा

नागेंद्र खारी ने बताया कि खसरा नंबर 122 में करीब पांच बीघा जमीन है, जिसमें उनकी हिस्सेदारी करीब ढाई बीघा बताई गई है। आरोप है कि रवि प्रधान ने अपना हिस्सा बेचने के बाद अब उनकी जमीन पर भी कब्जा करने का प्रयास किया।

नागेंद्र का कहना है कि जब वह अपनी जमीन पर निर्माण कराने पहुंचते हैं तो कथित रूप से उनका काम रुकवा दिया जाता है। उन्होंने पुलिस के माध्यम से दबाव बनाने और मारपीट किए जाने के भी आरोप लगाए हैं।

खसरा नंबर 121, 98 और 99 की जमीनों पर भी विवाद

नागेंद्र खारी ने खसरा नंबर 121 को लेकर आरोप लगाया कि रवि प्रधान के हिस्से की करीब साढ़े चार बीघा जमीन दल्लूपुरा निवासी एक व्यक्ति को बेची गई। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि नोएडा प्राधिकरण से कथित मिलीभगत कर करीब एक बीघा जमीन का मुआवजा भी लिया गया।

वहीं, खसरा नंबर 98 को लेकर नागेंद्र ने बताया कि उनके हिस्से में करीब 2850 गज और रवि प्रधान के हिस्से में भी लगभग 2850 गज जमीन बताई गई है। उनका आरोप है कि रवि प्रधान द्वारा करीब चार बीघा जमीन बेच दी गई, जिसमें उनके हिस्से की जमीन भी शामिल कर दी गई।

इसी तरह खसरा नंबर 99 में कुल करीब 3900 गज जमीन होने का दावा करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 3300 गज जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई, जबकि रवि प्रधान की हिस्सेदारी करीब 1950 गज बताई गई है।

खसरा 222 की जमीन दिखाकर खसरा 270 में कब्जा देने का आरोप

प्रेस वार्ता में नागेंद्र खारी ने खसरा नंबर 222 और 270 को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनके अनुसार खसरा नंबर 222 में वह और रवि प्रधान बराबर के हिस्सेदार हैं।

नागेंद्र का आरोप है कि खसरा नंबर 222 की जमीन दिखाकर लोगों के नाम रजिस्ट्री की गई, जबकि मौके पर कब्जा खसरा नंबर 270 की जमीन पर दिया गया। उनका दावा है कि खसरा नंबर 270 की जमीन नोएडा प्राधिकरण की है, जबकि खसरा नंबर 222 की जमीन अभी खाली पड़ी है।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज और मौके पर जमीन की वास्तविक स्थिति का मिलान कराकर पूरे मामले की जांच कराई जाए।

राजेंद्र फौजी ने भी जमीन विवाद को लेकर रखी अपनी शिकायत

प्रेस वार्ता में याकूबपुर निवासी राजेंद्र फौजी ने भी रवि प्रधान से जुड़े जमीन विवाद को लेकर अपनी बात रखी। राजेंद्र फौजी के अनुसार उनके पिता स्वर्गीय रामकरण ने 4 मार्च 1999 को इलाहाबास गांव में खसरा नंबर 134, 135, 139 और 154 में जमीन खरीदी थी।

उनका कहना है कि वर्ष 1999 में संबंधित लोगों की सहमति से खसरा नंबर 139 और 154 में एक स्थान पर जमीन देने की बात तय हुई थी। राजेंद्र फौजी का दावा है कि जिस स्थान पर उन्हें जमीन दी गई थी, उस पर वह आज तक काबिज हैं।

जमीन के स्थान को लेकर बाद में बढ़ा विवाद

राजेंद्र फौजी के मुताबिक, राजेश तिवारी ने 31 दिसंबर 2009 को दूसरे खातेदार से जमीन खरीदी थी। आरोप है कि इसके बाद रवि प्रधान ने राजेश तिवारी को बताया कि उनकी जमीन खसरा नंबर 139 और 154 में है, जबकि राजेश तिवारी दूसरी जगह जमीन खरीद चुके थे।

राजेंद्र फौजी का कहना है कि जमीन के स्थान और कब्जे को लेकर विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और मामला पुलिस तथा अदालत तक पहुंच गया।

फेस-2 थाने में मुकदमे से लेकर अदालत तक पहुंचा मामला

राजेंद्र फौजी ने आरोप लगाया कि राजेश तिवारी की ओर से उनके खिलाफ फेस-2 थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। उनका दावा है कि पुलिस जांच के बाद उक्त मामले में एफआर लगा दी गई।

इसके बाद राजेंद्र फौजी ने रवि प्रधान, राजेश तिवारी और अन्य कथित भूमाफिया के खिलाफ अदालत के माध्यम से मुकदमा दर्ज कराने की बात कही।

दस्तावेजों और मौके की स्थिति की जांच की मांग

प्रेस वार्ता के दौरान दोनों शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि संबंधित खसरा नंबरों के राजस्व अभिलेख, जमीन की हिस्सेदारी, रजिस्ट्री दस्तावेज, मुआवजे से जुड़े रिकॉर्ड और मौके पर वास्तविक कब्जे की स्थिति की जांच की जाए, ताकि विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।

दोनों ग्रामीणों ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर उनकी शिकायतों का समाधान नहीं होता है तो वे उच्च अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने के साथ ही मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी अपनी शिकायत लेकर जाएंगे।

हालांकि, प्रेस वार्ता में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ताओं के दावे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में रवि प्रधान अथवा अन्य संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाना उचित होगा।।

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