मऊ :
नवजात को मिला नया जीवन और नया परिवार,प्रद्युम्न बना ‘राजवीर जायसवाल।
।।देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक : एक मासूम नवजात के जीवन की शुरुआत भले ही बेहद कठिन परिस्थितियों में हुई, लेकिन चाइल्ड हेल्पलाइन, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों से अब उसे एक सुरक्षित परिवार और उज्ज्वल भविष्य मिल गया है। 14 अगस्त 2026 को जिलाधिकारी आनन्द वर्द्धन ने विधिक दत्तक ग्रहण प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद बालक को उसके नए माता-पिता को सौंपा।
जानकारी के अनुसार, 01 दिसंबर 2025 को थाना मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के पास एक नवजात शिशु लावारिस अवस्था में मिला था। नवजात के शरीर और सिर पर गंभीर चोटें थीं तथा सिर से लगातार रक्तस्राव हो रहा था। सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन-1098, मऊ ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए उसे सुरक्षित संरक्षण में लिया और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया।
चाइल्ड हेल्पलाइन तथा संबंधित विभागीय कर्मियों के निरंतर प्रयास, चिकित्सकीय उपचार और देखभाल से नवजात की हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ। कठिन परिस्थितियों से संघर्ष करने के बाद मासूम ने जीवन की नई उम्मीद हासिल की।
इसके बाद बालक के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार आवश्यक विधिक एवं दत्तक ग्रहण संबंधी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। 14 अगस्त 2026 को प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिलाधिकारी आनन्द वर्द्धन ने बालक को उसके नए परिवार को सौंप दिया।
दत्तक माता-पिता श्रीमती अर्चना जायसवाल एवं श्री अमर जायसवाल ने बालक को नया नाम ‘राजवीर जायसवाल’ दिया। अब राजवीर को माता-पिता का स्नेह, सुरक्षित परिवार, संरक्षण और बेहतर भविष्य की नई राह मिल गई है।
यह मामला केवल दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने की कहानी नहीं, बल्कि मानवता, संवेदनशीलता और सामूहिक प्रयास से एक मासूम जिंदगी को नई दिशा देने की मिसाल है। यह संदेश भी देता है कि प्रत्येक बच्चे को प्रेम, सुरक्षा, सम्मान और परिवार का अधिकार मिलना चाहिए।
चाइल्ड हेल्पलाइन, जनपद मऊ एवं राजकीय विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण ने इस कार्य में सहयोग देने वाले सभी संबंधित विभागों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं सहयोगी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके सामूहिक प्रयासों से बालक को जीवन की नई राह और एक सुरक्षित परिवार मिल सका।
