लखनऊ :
रजौली रोड बदहाल: जलभराव ने बढ़ाई,स्कूली बच्चों,राहगीरों की मुसीबत।
◆गड्ढों में तब्दील सड़क पर भरा पानी, करीब 25 गांवों की आवाजाही प्रभावित।।
।।रिपोर्टर-जयविंद यादव।।
दो टूक : राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र पैकरामऊ स्थित रजौली सड़क की बदहाली अबबारिश में राहगीरों के लिए मुसीबत बन गई है। जर्जर सड़क जगह-जगह टूटकर बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भरने से सड़क और भी खतरनाक हो गई है। हालात यह हैं कि राहगीरों और वाहन चालकों को सड़क पर गड्ढा है या पानी, इसका अंदाजा लगाना तक मुश्किल हो रहा है। रजौली रोड की तस्वीरें खुद बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं। अब सवाल यह है कि करीब 25 गांवों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े इस मार्ग की सुध जिम्मेदार अधिकारी कब लेंगे?
विस्तार :
जलनिकासी की व्यवस्था नहीं, सड़क पर जमा है पानी।
लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र पैकरामऊ स्थित रजौली सड़क पहले से ही गड्ढों मे तबदील थी सिर्फ दो दिन की बारिश में तालाब बन गई है। सड़क पर जगह-जगह भरा पानी गड्ढों को छिपा रहा है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए यह मार्ग अब महज परेशानी नहीं, बल्कि जानलेवा हादसे की खुली दावत बन चुका है और स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों के लिए जान का खतरा बना हुआ है लेकिन जिम्मेदार मूकदर्शक बने हुए है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क पहले से ही लंबे समय से खराब है, लेकिन बारिश के पानी की निकासी के लिए न तो प्रभावी नाली है और न ही पर्याप्त ड्रेनेज व्यवस्था। पानी सड़क पर ही जमा रहता है। लगातार जलभराव के कारण सड़क की बची हुई सतह भी तेजी से टूट रही है।
●करीब 25 गांवों का प्रमुख सम्पर्क मार्ग।
रजौली रोड आस- पास के करीब 25 गांवों के लोगों के लिए प्रमुख आवागमन मार्ग है। ग्रामीण इसी रास्ते से बाजार, रोजगार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचते हैं। सड़क की बदहाली का सबसे ज्यादा असर पैदल राहगीरों, बाइक सवारों और छोटे वाहनों पर पड़ रहा है।
●स्कूली बच्चे और मरीज सबसे ज्यादा परेशान।
जलभराव और गहरे गड्ढों के बीच से होकर स्कूली बच्चों को रोजाना गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक अस्पताल की एंबुलेंस भी इसी मार्ग से आती-जाती हैं। ऐसे में किसी आपात स्थिति में जर्जर सड़क और जलभराव बड़ी बाधा बन सकते हैं।
●तेज रफ्तार वाहन बन रहे पैदल राहगीरों की परेशानी।
सड़क पर जमा पानी के चलते वाहन चालकों को गड्ढों की गहराई का पता नहीं चलता। तेज रफ्तार वाहनों के गुजरने पर गंदा पानी सड़क किनारे खड़े राहगीरों और दुकानदारों पर उछलता है। बारिश के दिनों में यह समस्या और विकराल हो जाती है।
●खानापूर्ति नहीं, चाहिए स्थायी समाधान।
ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ गड्ढों में गिट्टी-मिट्टी डालकर खानापूर्ति करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पहले सड़क के दोनों ओर जलनिकासी की समुचित व्यवस्था कराई जाए और उसके बाद सड़क का स्थायी निर्माण कराया जाए, ताकि हर बारिश में वही स्थिति दोबारा न बने।
●अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की मांग।
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की वास्तविक स्थिति का आकलन कर पूरी सड़क की मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराया जाए और स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लेकर तत्काल जलनिकासी की ब्यवस्था करनी होगी, वरना यह सड़क किसी बड़े हादसे के बाद ही सुर्खियों में आएगी।
