सोमवार, 17 अगस्त 2026

लखनऊ: पारा में नगर निगम टीम और पुलिस पर जानलेवा हमला, गई थी अवैध डेयरी हटाने।||Lucknow: Deadly attack on Municipal Corporation team and police in Para, they had gone to remove illegal dairy.||

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लखनऊ: 
पारा में नगर निगम टीम और पुलिस पर जानलेवा हमला,गई थी अवैध डेयरी हटाने।
●रविवार-सोमवार को पारा क्षेत्र की दो घटनाओं पर खुफिया एजेंसियों पर उठ रहे सवाल।
दो टूक : लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र में अवैध डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची नगर निगम की टीम और पुलिस पर हुए पथराव व हमले ने राजधानी में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्रवाई के दौरान उपद्रवियों ने नगर निगम के तीन सरकारी वाहनों के शीशे तोड़ दिए और कई कर्मचारियों को चोटें आईं। इसी दौरान एक दरोगा को भी जमीन पर गिराकर उसकी गर्दन दबाने का आरोप है। साथी पुलिसकर्मियों ने समय रहते पहुंचकर दरोगा को हमलावरों के चंगुल से बचाया।
●विस्तार : 
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के थाना पारा क्षेत्र मे बीते रविवार को अवैध डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची नगर निगम टीम का विरोध तक सीमित करके देखना शायद पूरे मामले की गंभीरता को कम आंकना होगा। सवाल यह है कि सरकारी अभियान के दौरान आखिर इतनी बड़ी संख्या में लोग हिंसक विरोध पर कैसे उतर आए और पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद उपद्रवियों का दुस्साहस इतना बढ़ कैसे गया?
नगर निगम की टीम सड़क पर घूम रहे आवारा पशुओं को पकड़ने तथा अवैध डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पारा क्षेत्र में रविवार सुबह पहुंची थी। इसी दौरान गद्दी गैंग के पशुपालकों ने विरोध शुरू कर दिया और देखते ही देखते भीड़ ने टीम पर पथराव शुरु कर दिया। पथराव में नगर निगम के कई कर्मचारियों के पीठ और पैरों में चोटें आईं, जबकि सरकारी वाहन संख्या UP 32 WN 6007, UP 32 TN 7337 और UP 32 NN 2215 के शीशे क्षतिग्रस्त हो गए।
हंगामे के बीच पुलिस ने स्थिति संभालने का प्रयास किया। आरोप है कि उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाया और एक दरोगा को गिराकर उसकी गर्दन दबा दी। यदि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी तत्काल नहीं पहुंचते तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
हमले और भारी विरोध के बावजूद नगर निगम की टीम ने कार्रवाई जारी रखी और 18 भैंसों को पकड़कर ठाकुरगंज स्थित कांजी हाउस भेजा गया। मामले में पशु कल्याण प्रभारी जोन-6 अवधेश कुमार की ओर से थाना पारा में नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी गई है। पुलिस द्वारा आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है।
●पारा पुलिस और खुफिया तंत्र पर सवाल।
लखनऊ  के। थाना पारा क्षेत्र में रविवार सुबह और सोमवार की सुबह हुई घटना ने पारा पुलिस के साथ-साथ स्थानीय खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि अवैध डेयरियां लंबे समय से संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही थीं और नगर निगम को कार्रवाई के लिए पुलिस बल की आवश्यकता पड़ी, तो क्या पुलिस और खुफिया तंत्र को संभावित विरोध की जानकारी पहले से नहीं थी।
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि नगर निगम जोन में अवैध डेयरियां आखिर किसकी शह पर संचालित हो रही हैं? क्या स्थानीय स्तर पर इन गतिविधियों की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को नहीं है?
कल्याण सिंह वार्ड समेत पारा क्षेत्र के अन्य इलाकों में भी अवैध डेयरियों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि संबंधित पार्षदों, नगर निगम अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी क्या बनती है और अब तक इन गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
●जय नारायण सर्वोदय विद्यालय के प्रदर्शन ने भी उठाए सवाल।
इसी बीच सोमवार सुबह थाना पारा क्षेत्र के जय नारायण सर्वोदय विद्यालय की छात्राओं ने कालेज से डीएम आवास का घेराव करने कूच कर दी और बारिश मे 6 किलोमीटर का रास्ता भी तैयार कर लिया तब शासन प्रशासन को विरोध प्रदर्शन की जानकारी हुई। इतने बड़े प्रदर्शन को लेकर भी स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। छात्राओं का प्रदर्शन इतना बड़ा हो गया कि शासन प्रशासन के हांथ पांव फुल गए। विभाग के मंत्री से सचिव तक छात्राओं को समझाने आना पड़ा। इस बीच यातायात प्रभावित हुआ, ट्राफिक पुलिस को विरोध कघ जानकारी अपने एक्स हैण्डल पर देना पड़ा।
 लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्राएं स्कूल परिसर से बाहर कैसे पहुंचीं? यदि छात्राओं ने पहले भी विरोध प्रदर्शन किया था तो स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? 
एक तरफ पारा में नगर निगम की टीम और पुलिस पर हमला हुआ, वहीं दूसरी ओर छात्राओं के बड़े प्रदर्शन ने स्थानीय पुलिस एवं खुफिया व्यवस्था की सक्रियता पर प्रश्नचिह्न लगाया। दोनों घटनाओं की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों में एक सवाल समान है—क्या स्थानीय स्तर पर सूचनातंत्र और पुलिस की निगरानी व्यवस्था अपेक्षित रूप से काम कर रही है।
सरकारी टीम पर हमला और पुलिसकर्मी की गर्दन दबाने जैसे आरोप बेहद गंभीर हैं। ऐसे मामलों में केवल कुछ लोगों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होगी। यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि हमले की पृष्ठभूमि क्या थी, उपद्रवियों को किसका संरक्षण या समर्थन प्राप्त था और संभावित विरोध की सूचना पुलिस तक समय रहते क्यों नहीं पहुंची।
◆लखनऊ नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डां० अभिनव ने बताया कि नगर निगम टीम की कार्रवाई के दौरान उपद्रवियों ने पथराव कर नगर निगम के सरकारी वाहन को क्षतिग्रस्त किया है सरकारी कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। इस घटना  क्रम मे नगर निगम जोन छ: के अवधेश कुमार की तरफ से स्थानीय थाना पारा में तहरीर दी गई है पुलिस हमलावरो की तलाश मे जुटी हुई है। ताकि हमले के पीछे मौजूद लोगों कौन है।