लखनऊ :
युवक की मौत के पांच साल बाद डाक्टर दम्पति पर FIR दर्ज,कोरोना इलाज के नाम पर 14 लाख की वसूली का आरोप।।
।।डी एस शास्त्री।।
दो टूक : राजधानी लखनऊ के थाना पीजीआई क्षेत्र उतरेठिया मे संचालित आशा क्लीनिक पर पांच साल बाद दर्ज मुकदमे ने कोरोना काल के इलाज की व्यवस्था और निजी अस्पतालों की जवाबदेही पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पुलिस जांच में यह साफ होना बाकी है कि युवक के इलाज में वास्तव में क्या लापरवाही हुई, 14 लाख रुपये किस मद में लिए गए और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के बावजूद इतने वर्षों तक कार्रवाई क्यों लंबित रही।
विस्तार:
बताते चले कि कोरोना संक्रमण के दौर में इलाज के नाम पर कथित तौर पर लाखों रुपये वसूलने और 25 वर्षीय युवक की मौत के मामले में करीब पांच साल बाद पीजीआई पुलिस ने निजी अस्पताल पर मुकदमा दर्ज कर बड़ी कार्रवाई की है। उतरेटिया स्थित आशी क्लीनिक के संचालक डॉ. सूर्य प्रकाश शुक्ल और उनकी पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि युवक को कोरोना संक्रमित बताकर करीब दस दिन अस्पताल में भर्ती रखा गया और जांच व दवाओं के नाम पर परिजनों से लगभग 14 लाख रुपये वसूले गए। इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई थी।
यह पूरा मामला-- वर्ष 2021 के अप्रैल माह का है। अमेठी के इन्हौना निवासी एवं सेना से सेवानिवृत्त बृजेंद्र त्रिपाठी उस समय परिवार के साथ गीता पल्ली, बंगला बाजार में रहते थे। उनके 25 वर्षीय बेटे कामाख्या नारायण त्रिपाठी को सर्दी-जुकाम की शिकायत हुई थी। परिजन उसे इलाज के लिए उतरेटिया स्थित आशी क्लीनिक लेकर पहुंचे थे।
परिजन का आरोप है कि क्लीनिक पहुंचने के बाद युवक को कोरोना संक्रमित बताते हुए भर्ती कर लिया गया। करीब दस दिनों तक विभिन्न जांच और दवाओं के नाम पर उपचार किया गया। इस दौरान परिजनों से करीब 14 लाख रुपये की रकम वसूले जाने का आरोप है। इसके बाद युवक की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में भी उठे थे सवाल।
बेटे की मौत के बाद पिता बृजेंद्र त्रिपाठी ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए स्वास्थ्य विभाग में शिकायत की थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा की ओर से जांच कमेटी गठित की गई। करीब दो वर्ष बाद 2023 में जांच रिपोर्ट में अस्पताल संचालक को दोषी ठहराए जाने की बात सामने आई। आरोप है कि जांच में इलाज के दौरान लापरवाही के तथ्य सामने आए, लेकिन इसके बावजूद तत्काल प्रभावी कार्रवाई नी किया गया।
कार्रवाई के इंतजार में बंद हो गया क्लीनिक।
पीड़ित पिता का आरोप है कि वह अपने बेटे की मौत का न्याय पाने के लिए वर्षों तक अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे। इसी दौरान आशी क्लीनिक बंद हो गया और संचालक के मौके से फरार होने की बात भी सामने आई। लगातार शिकायतों और कार्रवाई की मांग के बाद आखिरकार पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज किया है।
इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह के मुताबिक आशी क्लीनिक के संचालक डॉ. सूर्य प्रकाश शुक्ल और उनकी पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
