गौतमबुद्धनगर: संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट, जिलाधिकारी ने दिए तैयारियां पूरी करने के सख्त निर्देश!!
दो टूक//गौतमबुद्धनगर, 18 अगस्त 2026। संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में बाढ़ पूर्व तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सिंचाई, राजस्व, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, पंचायती राज, पशु चिकित्सा, पुलिस, आपूर्ति, विद्युत, जल निगम, विकास प्राधिकरण एवं नगर निकाय समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि संभावित बाढ़ को देखते हुए सभी विभाग अपनी तैयारियां निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी करें। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो, इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय और बेहतर संचार व्यवस्था के साथ काम करें।
यमुना-हिंडन का जलस्तर सामान्य, कटान और बांधों की निगरानी के निर्देश
बैठक में सिंचाई विभाग ने बताया कि वर्तमान में यमुना और हिंडन नदियों का जलस्तर सामान्य है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को कटान वाले क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण करने और वहां चल रहे कार्यों की प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी बांधों का नियमित निरीक्षण करने के साथ रेनकट और रैटहोल वाले स्थानों की पहचान कर उनकी मरम्मत समय से कराने को कहा।
बाढ़ से बचाव के लिए बालू भरी बोरियां, जियो बैग्स, अन्य आवश्यक सामग्री और पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही बाढ़ योजना-2026 तैयार कर उसकी हार्ड कॉपी सभी संबंधित विभागों को उपलब्ध कराने को कहा गया।
कंट्रोल रूम और प्रभावित परिवारों की बनेगी पूरी सूची
जिलाधिकारी ने राजस्व विभाग को सभी तहसीलों में कंट्रोल रूम स्थापित कर शिफ्टवार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए। कंट्रोल रूम के दूरभाष नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने को भी कहा गया।
उन्होंने संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों और परिवारों की सूची पहले से तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रभावित लोगों की डायरेक्टरी में मोबाइल नंबर समेत आवश्यक जानकारी दर्ज की जाए। बीमार, असक्त लोगों और पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों की अलग सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर राहत एवं सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
खाद्यान्न, राहत सामग्री, डिग्निटी किट और पके भोजन की व्यवस्था के लिए टेंडर प्रक्रिया समय से पूरी करने तथा आवश्यक संसाधनों की कमी होने पर तत्काल मांग पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
स्वास्थ्य विभाग को दवाओं और मेडिकल टीमों की व्यवस्था के निर्देश
बाढ़ के दौरान फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग को पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए। बाढ़ ड्यूटी के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की सूची तैयार करने के साथ बाढ़ चौकियों पर आवश्यक दवाओं और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया।
लोक निर्माण विभाग को संभावित रूप से बंद होने वाले मुख्य मार्गों के साथ वैकल्पिक मार्गों की मरम्मत समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए। राहत केंद्रों और शरणालयों को प्रभावित क्षेत्रों से जोड़ने वाले संपर्क मार्गों की भी मरम्मत एवं पुनर्स्थापना सुनिश्चित करने को कहा गया।
राहत केंद्रों पर सफाई, पानी और पशुओं के लिए भी व्यवस्था
पंचायती राज विभाग को बाढ़ राहत केंद्रों, बाढ़ चौकियों और संभावित प्रभावित गांवों में साफ-सफाई, पेयजल सहित मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए।
पशु चिकित्सा विभाग को संभावित बाढ़ से प्रभावित होने वाली गौशालाओं का पहले से चिन्हांकन करने तथा पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। पशुओं के लिए पर्याप्त भूसा और हरे चारे की उपलब्धता रखने के साथ स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार के लिए मेडिकल टीम गठित करने के निर्देश दिए गए।
जलभराव वाले क्षेत्रों पर रहेगी विशेष नजर
जिलाधिकारी ने विकास प्राधिकरणों और नगर निकायों के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जलभराव की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। जल बहाव या जलभराव की समस्या सामने आने पर उसका तत्काल निस्तारण कराने को कहा गया। संबंधित मामलों में धारा-10 के तहत नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा अब तक जारी किए गए नोटिसों की रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
प्राधिकरणों और नगर निकायों को नालों की सफाई एवं जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखने तथा आवश्यक पंपिंग सेटों को पहले से चिन्हित कर उनकी सूची जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा गया। आमजन की बिजली, पानी और जलभराव समेत अन्य समस्याओं के समयबद्ध समाधान के लिए प्राधिकरणों को अपना ‘मित्रा ऐप’ सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक मात्रा में ब्लीचिंग पाउडर उपलब्ध कराने को भी कहा गया।
नाव, गोताखोर और पीएसी की व्यवस्था पहले से रखने के निर्देश
पुलिस विभाग को संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पीएसी बाढ़ वाहिनी की तैनाती, नावों और गोताखोरों की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। नाविकों और गोताखोरों की सूची संबंधित विभागों को उपलब्ध कराने तथा वायरलेस सेट सहित सभी आवश्यक संचार उपकरण तैयार रखने को कहा गया। अग्निशमन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर बाढ़ से निपटने की पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए गए।
बिजली-पानी और खाद्यान्न की आपूर्ति पर भी जोर
आपूर्ति विभाग को संभावित बाढ़ के दौरान पर्याप्त खाद्यान्न एवं आवश्यक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। विद्युत विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुचारु रखने, खराब ट्रांसफार्मरों को समय से ठीक कराने तथा बाढ़ चौकियों पर निर्बाध विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। खराब पोल और ढीले तारों को भी पहले से दुरुस्त करने को कहा गया।
जल निगम को सभी बाढ़ चौकियों पर हैंडपंपों की मरम्मत कराने तथा जहां हैंडपंप उपलब्ध नहीं हैं, वहां नए हैंडपंप स्थापित कराने के निर्देश दिए गए।
‘आपदा से पहले तैयारी’ पर प्रशासन का पूरा फोकस
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि संभावित बाढ़ की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अपने-अपने विभाग से संबंधित सभी तैयारियां समय से पूरी करें। उन्होंने कहा कि आपदा के समय त्वरित राहत एवं बचाव कार्य के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय, प्रभावी संचार और संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता बेहद जरूरी है। प्रशासन का उद्देश्य है कि संभावित बाढ़ की स्थिति में जनसामान्य को कम से कम परेशानी हो और जरूरत पड़ते ही राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किए जा सकें।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी भालचंद्र त्रिपाठी, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अजीत कुमार, एएसपी पुलिस संतोष कुमार, जिला आपदा विशेषज्ञ ओमकार चतुर्वेदी, उप जिलाधिकारीगण सहित सिंचाई, लोक निर्माण, स्वास्थ्य, पशुपालन, आपूर्ति, जल निगम, विकास प्राधिकरणों एवं नगर निकायों के संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
