।। सिद्धेश्वर पाण्डेय।।
दो टूक, आजमगढ़। दबिस्तान-ए-अयाज़ की ओर से गत रात्रि फूलपुर तहसील मोड़ स्थित ज़ेड एफ एम कार्यालय पर तरही मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आगाज हसब-ए-मामूल साक़िब जमाल ने तिलावत-ए-कलामुल्लाह से किया। मुशायरे की अध्यक्षता डॉ. शफ़ीक़ आज़मी ने की, जबकि निज़ामत की जिम्मेदारी नसीम साज़ ने निभाई।
इस अवसर पर नसीम साज़ ने कहा कि उर्दू भाषा और अदब के वास्तविक प्रचार-प्रसार में मासिक तरही मुशायरों और अदबी नशिस्तों की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि यह उर्दू और उर्दू वालों के लिए खुशी की बात है कि आज भी अदब के हवाले से महफिलों का आयोजन हो रहा है। तरही मुशायरों में शायर अपने फन की ताबा-आज़माई करते हैं और इन्हीं महफिलों से उर्दू अदब को ऐसे नायाब हीरे मिलते हैं, जो आगे चलकर अदब की आबियारी करते हैं।
उन्होंने ज़ेड एफ एम फाउंडेशन और ज़ीशान अहमद खान की सामाजिक एवं साहित्यिक सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि फाउंडेशन का उद्देश्य अदब को फरोग देना तथा समाज के दबे-कुचले तबके तक शिक्षा, बीमारों तक दवा और जरूरतमंदों तक आवश्यक सुविधाएं पहुंचाना है।
मुशायरे में डॉ. शफ़ीक़ आज़मी ने “घर की रौनक हुई ख़त्म सब, एक आँगन की दीवार से”, सुहैल अख़्तर सिकरौरी ने “एक सिपाही को महँगा पड़ा, छेड़ कर जंग सालार से”, मुख़्तार आलम आज़मी ने “आ गया जब अना का सवाल, हम तो उठ आए दरबार से”, मैकश आज़मी फूलपुरी ने “मेरी दहलीज़ की अहमियत, तुम न समझोगे मीनार से” तथा नसीम साज़ ने “अहल-ए-ख़ाना हैं बेज़ार से, अपने बच्चों के किरदार से” जैसे अशआर पेश कर वाहवाही बटोरी।
इसी क्रम में अनवर इस्लाही, डॉ. अनवर इस्लाही, आज़म भादवी, साक़िब जमाल, रफ़ीक़ फूलपुरी, अबू साद आज़मी, अबू शहमा शीराज़ी, साजिद बद्र, अहमद परवाज़ और अनवर आज़मी समेत अन्य शायरों ने अपने कलाम पेश किए। “इतने धोखे मिले हैं कि अब, मुझको लगता है डर प्यार से”, “पा गया इक नगीना कोई, एक कूड़े के अंबार से”, “बच न पाया कोई आज तक, ऐ मोहब्बत तेरे वार से” और “दिल को मेरे सुकूं मिल गया, आप के एक दीदार से” जैसे अशआर पर श्रोताओं ने खूब दाद दी।
इसके अलावा तसकीन आज़मी, डॉ. फ़ैयाज़ अलीग़ और डॉ. रिज़वान मुहज़बी समेत कई शायरों ने भी अपना कलाम पेश किया। देर रात तक चली अदबी महफिल में श्रोताओं ने शायरों के कलाम का आनंद लिया।
