सोमवार, 10 अगस्त 2026

मेरठ: शिवभक्तों की आस्था के बीच पार्किंग के नाम पर वसूली! पुरा महादेव से पहले ₹50 की पर्ची पर उठे सवाल!!

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मेरठ: शिवभक्तों की आस्था के बीच पार्किंग के नाम पर वसूली! पुरा महादेव से पहले ₹50 की पर्ची पर उठे सवाल!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

कीचड़ में बाइक खड़ी कराने के लिए श्रद्धालुओं से लिए जा रहे ₹50, कथित अवैध पार्किंग को लेकर प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल

दो टूक//मेरठ। सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पुरा महादेव मंदिर पहुंच रहे शिवभक्तों की आस्था के बीच पार्किंग व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि पुरा महादेव मंदिर से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले पार्किंग के नाम पर श्रद्धालुओं से प्रति बाइक ₹50 की वसूली की जा रही है। कथित तौर पर इसके लिए पर्चियां भी दी जा रही हैं।

शिवभक्तों का आरोप है कि पार्किंग के नाम पर पैसे लेने के बावजूद वाहनों को किसी व्यवस्थित और सुरक्षित स्थान पर खड़ा कराने के बजाय कीचड़ भरे स्थान पर बाइक खड़ी कराई जा रही हैं। इससे श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लंबी दूरी तय कर मंदिर पहुंचने वाले शिवभक्तों का कहना है कि आस्था की यात्रा में ऐसी अव्यवस्था उनकी परेशानी को और बढ़ा रही है।

₹50 की पर्ची ने खड़े किए कई सवाल

पार्किंग के नाम पर ₹50 वसूले जाने और पर्ची दिए जाने की बात सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर यह पार्किंग किसकी अनुमति से संचालित की जा रही है? पार्किंग शुल्क निर्धारित करने का अधिकार किसके पास है? श्रद्धालुओं से वसूली जाने वाली रकम का कोई अधिकृत प्रावधान है या नहीं? और सबसे बड़ा सवाल यह कि यदि पार्किंग अधिकृत है तो श्रद्धालुओं के वाहनों को कीचड़ में खड़ा करने की नौबत क्यों आ रही है?

शिवभक्तों का कहना है कि भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण पार्किंग के नाम पर रोजाना बड़ी रकम की वसूली होने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन को पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि पार्किंग व्यवस्था वैध है अथवा इसके नाम पर कथित तौर पर अवैध वसूली की जा रही है।

पुलिस की मौजूदगी में कथित वसूली, संरक्षण के आरोपों से मचा हड़कंप

मामला मेरठ के रोहटा थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद पार्किंग के नाम पर श्रद्धालुओं से पैसे लिए जा रहे हैं। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि पार्किंग अवैध है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही और यदि पार्किंग वैध है तो इसकी अनुमति, शुल्क और संचालन की स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?

हालांकि, स्थानीय पुलिस के संरक्षण में पार्किंग संचालित होने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में अंतर?

कांवड़ यात्रा और सावन के दौरान शासन-प्रशासन की ओर से लगातार श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम आवागमन को प्राथमिकता देने की बात कही जाती है। अधिकारियों द्वारा भीड़ नियंत्रण से लेकर पार्किंग और यातायात व्यवस्था तक तमाम इंतजाम किए जाने के दावे किए जाते हैं।

लेकिन पुरा महादेव मंदिर के रास्ते में सामने आई कथित पार्किंग अव्यवस्था ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि उनसे पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है तो कम से कम वाहन खड़ा करने के लिए साफ-सुथरी, सुरक्षित और व्यवस्थित जगह उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

प्रशासन से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

शिवभक्तों और स्थानीय लोगों ने मेरठ जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि पार्किंग के नाम पर यदि बिना अनुमति वसूली की जा रही है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि पार्किंग अधिकृत है तो शुल्क, अनुमति और पार्किंग की व्यवस्था की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।

श्रद्धालुओं की मांग है कि प्रशासन मौके पर जांच कर पार्किंग की वैधता, ₹50 शुल्क की अनुमति, पर्चियों की सत्यता और पार्किंग स्थल की व्यवस्था की जांच करे, ताकि शिवभक्तों को किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े।

अब देखने वाली बात यह होगी कि शिवभक्तों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों के बीच पार्किंग के नाम पर कथित वसूली और अव्यवस्था की शिकायत पर मेरठ प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है।