मंगलवार, 21 जुलाई 2026

सुल्तानपुर : :धान की रोपाई कर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, बोले,"सड़क नहीं तो वोट नहीं।।Sultanpur:The villagers' anger erupted after planting rice, saying, "No road, no vote."||

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 सुल्तानपुर : :
धान की रोपाई कर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, बोले,"सड़क नहीं तो वोट नहीं।।
दो टूक : सुल्तानपुर जनपद के जयसिंहपुर क्षेत्र बिशुनदासपुर में जर्जर सड़क पर उतरे ग्रामीण, बरसों से बदहाल मार्ग को लेकर अनोखा प्रदर्शन, चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
विस्तार :
सुल्तानपुर जनपद के जयसिंहपुर क्षेत्र में जनहित के सबसे बुनियादी मुद्दे सड़क को लेकर सोमवार को जयसिंहपुर क्षेत्र के बिशुनदासपुर गांव में ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया। मुईली-दुबेपुर मार्ग पर वर्षों से जर्जर पड़ी सड़क के विरोध में कटका क्लब सामाजिक संस्था के बैनर तले ग्रामीणों ने सड़क पर धान की रोपाई कर अनोखे ढंग से प्रदर्शन किया। इस दौरान पूरे क्षेत्र में "सड़क नहीं तो वोट नहीं" के नारों से माहौल गूंज उठा और ग्रामीणों ने आगामी चुनाव के बहिष्कार तक की चेतावनी दे डाली।
प्रदर्शन का नेतृत्व मनोज कुमार विश्वकर्मा ने किया। कटका क्लब के अध्यक्ष डॉ. सौरभ मिश्र 'विनम्र' ने कहा कि यह सड़क वर्षों से बदहाल है। हल्की बारिश होते ही सड़क तालाब में बदल जाती है, जिससे प्राथमिक और इंटर कॉलेज के सैकड़ों छात्र-छात्राओं, किसानों, मरीजों और राहगीरों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, समाधान नहीं।
मनोज कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि जनता को अपनी जायज़ मांगों के लिए सड़क पर उतरकर विरोध करना पड़ रहा है, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता है। उन्होंने कहा कि अब वादों और घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि सड़क निर्माण का कार्य तत्काल शुरू होना चाहिए।
ग्रामीणों ने प्रशासन को 20 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय के भीतर सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। साथ ही पूरे क्षेत्र में "सड़क नहीं तो वोट नहीं" अभियान चलाकर लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया जाएगा।
प्रदर्शन में बरकत अली, शौकत, कालीदीन, गुड्डू, रामदीन, विजय प्रताप, कौशलेंद्र सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के दावों के बीच उनकी सबसे बुनियादी जरूरत आज भी अधूरी है और अब वे समाधान मिलने तक अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।