गौतमबुद्धनगर: दनकौर में कुपोषण पर सख्त प्रहार: 'संभव 6.0' अभियान के तहत घर-घर पहुंचेगी पोषण सुरक्षा, लापरवाही पर होगी जवाबदेही!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
दो टूक//गौतमबुद्धनगर। जनपद में बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से मुक्त करने के उद्देश्य से बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने 'संभव 6.0' अभियान को तेज गति से लागू कर दिया है। दनकौर परियोजना क्षेत्र में अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर घर-घर तक सघन मॉनिटरिंग और पोषण संबंधी गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य "गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा" सुनिश्चित करना है, ताकि कोई भी बच्चा या गर्भवती महिला पोषण संबंधी सुविधाओं से वंचित न रहे।
बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय द्वारा अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मुख्य सेविकाओं (सुपरवाइजर्स) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत मैदानी स्तर पर कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर संबंधित कर्मियों की जवाबदेही तय होगी।
अभियान के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने-अपने केंद्रों पर पंजीकृत 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों का वजन और लंबाई/ऊंचाई मापकर उनकी पोषण स्थिति का आकलन करेंगी। बच्चों को सामान्य, मध्यम कुपोषित (MAM) और अति कुपोषित (SAM) श्रेणियों में चिन्हित किया जाएगा। इसके साथ ही अति कुपोषित बच्चों, मध्यम कुपोषित बच्चों तथा जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के घर-घर जाकर व्यक्तिगत परामर्श दिया जाएगा।
विभाग की ओर से माताओं को शिशु के जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराने, छह माह तक केवल स्तनपान कराने, छह माह के बाद पौष्टिक ऊपरी आहार शुरू करने और स्वच्छता अपनाने के प्रति जागरूक किया जाएगा। साथ ही पात्र गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तथा बच्चों को टेक होम राशन (THR) और पोषण पोटली का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन बच्चों में गंभीर कुपोषण या अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पाई जाएंगी, उन्हें स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) भेजा जाएगा।
अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सेविकाओं को विशेष मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे अपने-अपने क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि वजन मशीन एवं लेंथ बोर्ड का सही तरीके से उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे गृह भ्रमण और पोषण परामर्श का मौके पर पहुंचकर सत्यापन भी किया जाएगा।
विभाग पोषण ट्रैकर ऐप पर दर्ज आंकड़ों और केंद्रों से प्राप्त रिपोर्ट का मिलान कर शत-प्रतिशत सटीक डेटा तैयार करेगा। वहीं सेक्टर स्तर पर एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं के साथ नियमित बैठकें आयोजित कर कुपोषित बच्चों के टीकाकरण और स्वास्थ्य स्थिति की भी लगातार समीक्षा की जाएगी।
परियोजना स्तर पर पूरे अभियान की निगरानी के लिए मजबूत समीक्षा व्यवस्था लागू की गई है। मुख्य सेविकाएं प्रतिदिन अपने-अपने सेक्टर की रिपोर्ट तैयार करेंगी, जबकि साप्ताहिक स्तर पर अभियान की प्रगति की समीक्षा होगी। यदि किसी केंद्र पर फर्जी आंकड़े दर्ज करने, बच्चों का वजन न करने या गृह भ्रमण में लापरवाही जैसी शिकायत सामने आती है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बाल विकास परियोजना अधिकारी संध्या सोनी ने बताया कि 'संभव 6.0' अभियान का उद्देश्य केवल कुपोषित बच्चों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि गर्भावस्था से लेकर बाल्यावस्था तक प्रत्येक लाभार्थी को समय पर पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और जागरूकता उपलब्ध कराकर जनपद को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाना है।।
