लखनऊ :
कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में इस्तीफों का सिलसिला जारी, एक और प्रोफेसर ने छोड़ी नौकरी; अब तक 21 डॉक्टर दे चुके हैं इस्तीफा।
।।डी एस शास्त्री।।
●साइकेट्री विभाग पर लगा ताला, कम वेतन और बेहतर अवसरों की तलाश को माना जा रहा प्रमुख कारण।
दो टूक : राजधानी लखनऊ स्थित कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान में चिकित्सकों के इस्तीफों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। संस्थान से एक और डॉक्टर के इस्तीफा देने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक वर्ष 2017 से संस्थान के 21 चिकित्सक अपनी सेवाएं छोड़ चुके हैं। ताजा घटनाक्रम में साइकेट्री विभाग में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिनव तिवारी ने एक माह के नोटिस के साथ अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
विस्तार :
कैंसर संस्थान के प्रवक्ता डाक्टर वरुण विजय ने जानकारी देते हुए बताया कि
संस्थान के साइकेट्री विभाग के एकलौते असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिनव तिवारी ने पिछले वर्ष सितंबर में संस्थान में कार्यभार ग्रहण किया था। उन्होंने सोमवार 27 जुलाई को इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद संस्थान का साइकेट्री विभाग फिलहाल बंद होने की स्थिति में पहुंच गया है जिससे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, संस्थान में कार्यरत चिकित्सकों को अन्य सरकारी एवं प्रमुख चिकित्सा संस्थानों की तुलना में अपेक्षाकृत कम वेतन मिलने की बात लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। माना जा रहा है कि यही वजह डॉक्टरों के लगातार संस्थान छोड़ने के प्रमुख कारणों में शामिल है। हालांकि, इस संबंध में संस्थान प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
लगातार हो रहे इस्तीफों ने संस्थान में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि यह क्रम जारी रहा तो भविष्य में मरीजों को उपचार के दौरान और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, डॉ. अभिनव तिवारी के इस्तीफे तथा विभागीय व्यवस्था को लेकर संस्थान प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। देखा जाय तो 2026 मे लगातार अब-तक डाक्टर सोनम सिंह, डाक्टर मायंक सिंह समेत तीन डाक्टरों ने अपना इस्तीफा दे चुके है।
◆संस्थान में डाक्टरो का अभाव,कैंसर मरीजों पर पड़ असर:
विशेषज्ञ डॉक्टरों की लगातार कमी से कैंसर मरीजों को समय पर परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और समुचित उपचार मिलने में कठिनाई हो सकती है। नए मरीजों की जांच और फॉलोअप में देरी बढ़ने की आशंका है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
