बुधवार, 8 जुलाई 2026

गौतमबुद्धनगर: खुले मेनहोल में समाया 10 वर्षीय मासूम, एआरटीओ की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा; ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल!!

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गौतमबुद्धनगर: खुले मेनहोल में समाया 10 वर्षीय मासूम, एआरटीओ की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा; ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//ग्रेटर नोएडा। शहर में मानसून के दौरान जलभराव और खुले मेनहोल लोगों की जान के लिए कितना बड़ा खतरा बन चुके हैं, इसका एक गंभीर उदाहरण सोमवार को यथार्थ अस्पताल के समीप देखने को मिला। यहां सड़क किनारे बिना ढक्कन के खुले पड़े सीवर मेनहोल में एक 10 वर्षीय मासूम अचानक गिर गया। बच्चे के मेनहोल में गिरते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई और उसकी मां की चीख-पुकार से आसपास के लोग जुट गए। संयोग से उसी समय वहां से गुजर रहे एआरटीओ राजेश मोहन और उनकी टीम ने तत्काल रेस्क्यू कर बच्चे को सकुशल बाहर निकाल लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यथार्थ अस्पताल के सामने लंबे समय से सीवर का मेनहोल खुला पड़ा था। सोमवार को एक 10 वर्षीय बच्चा वहां से गुजर रहा था कि अचानक उसका पैर फिसल गया और वह सीधे गहरे मेनहोल में जा गिरा। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। गहरे मेनहोल में गिरे बच्चे को सुरक्षित निकालना लोगों के लिए चुनौती बन गया और हर कोई उसकी सलामती के लिए प्रयास करने लगा।

इसी दौरान एआरटीओ राजेश मोहन अपनी टीम के साथ वहां से गुजर रहे थे। भीड़ और शोर-शराबा देखकर उन्होंने तुरंत वाहन रुकवाया और स्थिति का जायजा लिया। बिना समय गंवाए उन्होंने अपनी टीम के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया। टीम ने सूझबूझ और तत्परता का परिचय देते हुए कुछ ही देर में बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

बच्चे को बाहर निकालने के बाद तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। राहत की बात यह रही कि उसे केवल मामूली चोटें आईं। उपचार के बाद बच्चे को सुरक्षित उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। अपने बच्चे को सकुशल देखकर परिजनों ने राहत की सांस ली और एआरटीओ राजेश मोहन व उनकी टीम का आभार व्यक्त किया।

इस घटना ने एक बार फिर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर के कई इलाकों में सीवर के मेनहोल लंबे समय से खुले पड़े हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद उन्हें बंद कराने या सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। बरसात के मौसम में ये खुले मेनहोल आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि मानसून को लेकर प्राधिकरण द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग दिखाई देती है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते खुले मेनहोलों को सुरक्षित नहीं किया गया तो भविष्य में इससे भी बड़े हादसे हो सकते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले भी ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में खुले मेनहोल और जलभराव के कारण कई दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सोमवार की घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि यदि समय रहते प्राधिकरण ने लापरवाही पर अंकुश नहीं लगाया, तो ऐसे हादसे किसी बड़ी जनहानि का कारण बन सकते हैं। फिलहाल, एआरटीओ राजेश मोहन और उनकी टीम की त्वरित कार्रवाई ने एक मासूम की जिंदगी बचाकर मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश की है।।