गौतमबुद्धनगर: जिम्स कर्मचारियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में भाकियू का प्रदर्शन, गिरफ्तार युवाओं की रिहाई और बहाली की मांग!!
दो टूक//ग्रेटर नोएडा। जिम्स (गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) अस्पताल में अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने एसीपी को ज्ञापन सौंपकर गिरफ्तार किए गए युवाओं की तत्काल रिहाई तथा कर्मचारियों की बहाली की मांग की।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव पवन खटाना ने कहा कि जिम्स अस्पताल में अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे कर्मचारियों को पुलिस बल के सहारे जबरन हटाना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि धरनारत युवाओं के साथ बल प्रयोग किया गया और उन्हें गिरफ्तार कर आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया, जो पूरी तरह से निंदनीय है।
पवन खटाना ने कहा कि पुलिस प्रशासन और शासन का रवैया कर्मचारियों एवं युवाओं के प्रति संवेदनशील नहीं दिखाई दे रहा है। किसी भी समस्या का समाधान बातचीत और संवाद के माध्यम से होना चाहिए, न कि बल प्रयोग के जरिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को सुनने के बजाय उन पर कार्रवाई करना सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
भाकियू नेताओं ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि धरने के दौरान हिरासत में लिए गए सभी युवाओं को बिना किसी शर्त के तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही जिन कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया है, उन्हें तुरंत कार्य पर वापस लिया जाए। संगठन ने जिम्स प्रशासन और संस्थान के निदेशक की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। उनका कहना है कि कर्मचारियों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या वादाखिलाफी हुई है तो उसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
राष्ट्रीय महासचिव ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया और गिरफ्तार युवाओं को रिहा नहीं किया गया तो किसान संगठन व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और शासन की होगी।
इस अवसर पर रॉबिन नागर, सुनील प्रधान, बली भाटी, सुरेंद्र नागर, मटरू नागर, अजीत अधाना, राजीव मलिक, अमित डेढ़ा, अमित जैलदार, धर्मेंद्र चपराना, योगेश भाटी, धर्मपाल स्वामी, ऋषि पंडित, नागेश दरोगा सहित सैकड़ों किसान कार्यकर्ता मौजूद रहे।
भाकियू ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि कर्मचारियों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।।
