गुरुवार, 25 जून 2026

गौतमबुद्धनगर: आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार था: मनसुख मंडाविया, संविधान हत्या दिवस पर गूंजा लोकतंत्र का संकल्प!!

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गौतमबुद्धनगर: आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार था: मनसुख मंडाविया, संविधान हत्या दिवस पर गूंजा लोकतंत्र का संकल्प!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//नोएडा। भारतीय जनता पार्टी नोएडा महानगर द्वारा गुरुवार को "संविधान हत्या दिवस" के अवसर पर सेक्टर-27 क्लब में एक भव्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए उसकी विभीषिका को याद किया गया तथा लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और संविधान के सम्मान का संकल्प भी दोहराया गया।

कार्यक्रम का आयोजन भाजपा नोएडा महानगर के जिलाध्यक्ष महेश चौहान के नेतृत्व में किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया उपस्थित रहे। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं गौतमबुद्धनगर सांसद डॉ. महेश शर्मा, भाजपा पश्चिम क्षेत्र के नवनियुक्त क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर तथा भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सत्ता के अहंकार में संविधान, न्यायपालिका, मीडिया और नागरिक अधिकारों का गला घोंटने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल अतीत की घटनाओं का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि वह समाज को दिशा और दर्शन भी प्रदान करता है। इसलिए आपातकाल की घटनाओं को सदैव स्मरण रखना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो सके।

डॉ. मंडाविया ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा सदियों पुरानी रही है। प्राचीन काल में भी महाजन सभाएं, किसान सभाएं और विभिन्न सामाजिक समूह शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे तथा राजाओं को सलाह देते थे, जिसका सम्मान किया जाता था। उन्होंने कहा कि लेकिन आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर देश पर एक ऐसा काला अध्याय थोपा गया, जिसे भारतीय लोकतंत्र कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें आपातकाल की सच्चाई जाननी चाहिए और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहना चाहिए।

इस अवसर पर सांसद डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि आपातकाल केवल राजनीतिक विरोधियों को जेल में डालने का मामला नहीं था, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक आत्मा पर किया गया सबसे बड़ा प्रहार था। उन्होंने कहा कि जिन लोकतंत्र सेनानियों ने उस दौर में संघर्ष किया और यातनाएं झेलीं, उनका योगदान राष्ट्र सदैव याद रखेगा। लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।

भाजपा पश्चिम क्षेत्र के नवनियुक्त क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे आपातकाल की वास्तविक घटनाओं और उसके दुष्परिणामों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करें, ताकि भविष्य में कोई भी सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं पर कुठाराघात करने का दुस्साहस न कर सके।

कार्यक्रम के दौरान आपातकाल के समय लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में किशन लाल पारासर, राम अवतार गर्ग, सलेक चंद गर्ग, रघुराज सिंह और गोविंद महेश्वरी सहित अन्य लोकतंत्र सेनानी शामिल रहे। उपस्थित अतिथियों ने उनके राष्ट्र निर्माण, लोकतंत्र की रक्षा और देश सेवा में दिए गए योगदान को नमन करते हुए उन्हें सम्मानित किया।

इस अवसर पर भाजपा के क्षेत्रीय महामंत्री हरीश ठाकुर, जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, कार्यक्रम संयोजक सुचित्र कक्कड़, मनीष वाल्मीकि, मीनाक्षी चौहान, राहुल शर्मा, अमित त्यागी, चंदगीराम यादव, ओमवीर अवाना, विनोद शर्मा, डिंपल आनंद, प्रज्ञा पाठक, अर्पित मिश्रा, शिवांश श्रीवास्तव, नीरज चौधरी, मनीष तिवारी, रामकिशन यादव, सत्यनारायण महावर, शारदा चतुर्वेदी, मोनिका श्रीवास्तव, सुनीता शर्मा, दीपाली दीक्षित, पी.सी. पंचोली सहित विभिन्न मंडलों, मोर्चों एवं प्रकोष्ठों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कार्यक्रम का समापन लोकतंत्र की रक्षा, संविधान के सम्मान और नागरिक अधिकारों के संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ। वक्ताओं ने कहा कि आपातकाल का इतिहास केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति देशवासियों को सदैव जागरूक रहने का संदेश भी है।।