बुधवार, 10 जून 2026

गौतमबुद्धनगर: हिंडन-यमुना डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण पर प्रशासन सख्त, बाढ़ से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी!!

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गौतमबुद्धनगर: हिंडन-यमुना डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण पर प्रशासन सख्त, बाढ़ से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक// गौतमबुद्धनगर, 10 जून 2026। आगामी मानसून और संभावित बाढ़ को देखते हुए सिंचाई विभाग ने हिंडन और यमुना नदी के डूब क्षेत्रों में हो रहे अवैध निर्माणों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि डूब क्षेत्र में बनाए गए अवैध निर्माणों को बाढ़ से होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति के लिए निर्माणकर्ता स्वयं जिम्मेदार होंगे। ऐसी स्थिति में शासन, जिला प्रशासन अथवा सिंचाई विभाग की ओर से कोई राहत, मुआवजा या सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

सिंचाई निर्माण खंड गाजियाबाद के अधिशासी अभियंता द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार गौतमबुद्धनगर में हिंडन नदी के तटवर्ती क्षेत्र एवं रिंग बंध के आसपास स्थित कई गांव डूब क्षेत्र की परिधि में आते हैं। इनमें छजारसी, चोटपुर, यूसुफपुर, चकशाहबेरी, बहलोलपुर, गढ़ी चौखंडी, हैबतपुर, परथला खंजरपुर, सौरखा जाहिदाबाद, ककराला, अलावर्दीपुर, जलपुरा, हल्दोनी और कुलेसरा सहित अन्य गांव शामिल हैं। वहीं हिंडन-यमुना दोआब बंध के निकट इलाहावास, सूथियाना, शहदरा, लखनावली, बेगमपुर, मुबारकपुर, गुर्जरपुर, झटटा, बादौली बांगर, तुगलपुर, कोंडली बांगर, शफीपुर, चुहड़पुर और मोमनाथल तक का क्षेत्र भी डूब प्रभावित क्षेत्र की श्रेणी में आता है।

इसके अलावा यमुना नदी के बाएं किनारे पर स्थित मोतीपुर, तिलवाड़ा, गढ़ी समस्तीपुर, बादौली खादर, कोंडली खादर, कामबख्शपुर, गुलावली, दोस्तपुर मंगरौली, छपरौली और असदुल्लापुर के साथ-साथ हरियाणा सीमा से लगे औरंगाबाद, दलेलपुर तथा याकूतपुर की भूमि भी डूब क्षेत्र की परिधि में चिन्हित की गई है।

विभाग के अनुसार इन क्षेत्रों में भवनों, स्कूलों, फार्म हाउसों, क्रेशर प्लांट, हॉट मिक्स प्लांट, रेडी मिक्स कंक्रीट प्लांट तथा बदरपुर और रेत धुलाई से संबंधित संरचनाओं का अवैध निर्माण किया जा रहा है। बाढ़ के दौरान नदी की प्राकृतिक धारा में अवरोध उत्पन्न होने से ऐसे निर्माण गंभीर खतरे का कारण बन सकते हैं, जिससे भारी जनहानि और आर्थिक नुकसान होने की आशंका बनी रहती है।

प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि शासनादेश संख्या 1417/27-सिं-2-181/बाढ़/09 दिनांक 16 मार्च 2010 तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा आकाश वशिष्ठ एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य मामले में 20 मई 2013 को पारित आदेश के तहत डूब क्षेत्रों में इस प्रकार के निर्माण प्रतिबंधित हैं। आदेशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अवैध निर्माणों को बाढ़ से होने वाली क्षति की कोई प्रतिपूर्ति शासन द्वारा नहीं की जाएगी और न ही ऐसे निर्माणों के लिए बाढ़ सुरक्षा कार्य कराए जाएंगे। साथ ही, अवैध निर्माणों से होने वाली क्षति की वसूली संबंधित निर्माणकर्ताओं से की जा सकती है।

सिंचाई विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे डूब क्षेत्रों में किए गए अवैध निर्माणों को तत्काल हटाएं अथवा स्वयं ध्वस्त कर दें और भविष्य में किसी भी प्रकार का नया निर्माण न करें। विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित क्षेत्रों में अवैध निर्माण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा से होने वाली अप्रत्याशित जन-धन की हानि के लिए संबंधित निर्माणकर्ता स्वयं उत्तरदायी होंगे।

सिंचाई विभाग ने दो टूक कहा है कि डूब क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माणों के संबंध में विभाग और जिला प्रशासन किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं लेंगे। इसलिए लोगों को समय रहते सावधानी बरतते हुए नियमों का पालन करना चाहिए। सूचना विभाग गौतमबुद्धनगर द्वारा यह जानकारी जारी की गई है।