सोमवार, 25 मई 2026

मऊ :भू-अधिग्रहण पर किसानों का फूटा गुस्सा,पुश्तैनी जमीन कौड़ियों में नहीं देंगे।||Mau:Farmers express anger over land acquisition; they will not give up their ancestral land for a pittance.||

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मऊ :
भू-अधिग्रहण पर किसानों का फूटा गुस्सा,पुश्तैनी जमीन कौड़ियों में नहीं देंगे।।
।।देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक : मऊ जनपद में आवास विकास के भू-अधिग्रहण पर किसानों का फूटा गुस्सा,और अपनी पुश्तैनी जमीन कौड़ियों में देंने से मना कर दिया।
विस्तार :
मऊ आवास विकास प्राधिकरण द्वारा मऊ में करीब 200 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने के फैसले ने किसानों की नींद उड़ा दी है। आरोप है कि अधिग्रहण से पहले रेट तय करने के लिए किसानों से कोई बैठक ही नहीं की गई। एक महीने बाद जब अधिकारी लौटे तो मुंह से “कौड़ियों का भाव” निकला और किसान सन्न रह गए।

*“आय दोगुनी छोड़िए, कमर ही तोड़ दी”*  
किसानों का दर्द छलक पड़ा। शहरोज के बुजुर्ग किसान रामनरेश यादव बोले, “सरकार कहती है अन्नदाता खुशहाल तो देश खुशहाल, आय दोगुनी हो रही है। लेकिन आवास विकास वाले हमारी आय दोगुनी छोड़िए, कमर ही तोड़कर चले गए।” रेवरीडीह की किसान महिला सुनीता देवी ने कहा, “यह जमीन हमारे दादा-परदादा की है। पेट काटकर इसे सींचा है। अब इसे कौड़ियों में बेचकर हम कहां जाएंगे?”

*महापंचायत में हुंकार*  
आक्रोश पांच मौजों—शहरोज, रेवरीडीह, मेरी, डाड़ी खास और मुहम्मदपुर शहरोज—के किसानों को एक मंच पर ले आया। शुक्रवार को बुलाई गई महापंचायत में सर्वसम्मति से ऐलान हुआ: “जब तक उचित मुआवजा और पारदर्शी प्रक्रिया नहीं, तब तक एक इंच जमीन नहीं देंगे।”
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर अधिकारियों ने मनमानी रेट थोपने की कोशिश की तो आंदोलन सड़कों से लेकर कलेक्ट्रेट तक पहुंचेगा। उनका कहना है कि अधिग्रहण नीति के नाम पर किसानों को अंधेरे में रखकर सौदा करना अन्याय है।

अब सबकी नजरें जिला प्रशासन और आवास विकास पर हैं कि वह किसानों से वार्ता कर उचित मुआवजा तय करते हैं या टकराव की राह चुनते हैं।