शुक्रवार, 29 मई 2026

बस्ती :दो दशकों से एक जिला, सात साल से वही कुर्सी, क्या उखाड़ेगी इनकी तबादला नीति ।||Basti:One district for two decades, same position for seven years, will their transfer policy uproot them?||

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बस्ती :
दो दशकों से एक जिला, सात साल से वही कुर्सी, क्या उखाड़ेगी इनकी तबादला नीति ।
दो टूक  :  वही कातिल वही मुंसिफ कहां इंसाफ फिर होगा। स्वास्थ्य विभाग के लिए सबसे सटीक हैं ये लाइने जहां तमाम नियम कानूनों को धता बताते हुए कुछ लोग दशकों से एक ही जिले में और सालों से एक ही कुर्सी पर तैनाती का सुख भोग रहे हैं।  तबादला नीति का खुलेआम सुख उठा रहे है। मामला बस्ती जिले का है।
विस्तार:
बस्ती जिले का हाल सबसे गज़ब है जहां लगभग 28 सालों से उसी जिले में और सात सालों से उसी कुर्सी पर काबिज चीफ फार्मासिस्ट एक बार फिर से अपनी मनमानी पर उतारू है। मामला अजय कुमार मिश्र, चीफ फार्मासिस्ट (ईएचआरएमएस-190620) सीएमएसडी स्टोर आधीन सीएमओ बस्ती का है जो तमाम तबादला नियमावली को एक बार फिर से धता बताने की तैयारी में है। भारतीय किसान यूनियन भानू गुट से लेकर कई राजनैतिक दलों पर समाजसेवियों ने उक्त चीफ फार्मासिस्ट की शिकायतों का अंबार लगा दिया है पर उसका बाल भी बांका नहीं हो सकता है। 
हाल ही में स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर उक्त फार्मासिस्ट सीएमएसडी, बस्ती, अजय कुमार मिश्र पर अपनी जगह एक वार्ड ब्वाय राम ललित बौद्ध से स्टाकबुक व वितरण बाउचर में हस्ताक्षर करवाने व इसे स्वीकार करने के आरोप सिद्ध होने पर की गयी कारवाई से अवगत कराने का भी पत्र भेजा गया है। 
भारतीय किसान यूनियन की स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों तक भेजी गयी शिकायत में कहा गया है कि चीफ फार्मासिस्ट, सीएमएसडी बस्ती अझय कुमार मिश्र ने दशकों से एक ही स्थान पर बने रहते हुए कदाचार व भ्रष्ट चरण का रिकॉर्ड कायम किया और अकूत संपत्ति बनाई है। शिकायत में मिश्र के लखनऊ में संपत्ति खड़ा करने और अपनी बेटी का करोड़ों खर्च पेड मेडिकल सीट पर एमबीबीएस में दाखिला कराने का भी हवाला दिया गया है। शिकायतकर्त्ता आशुतोष सिंह सोनू, एक अन्य समाजसेवी संजीव त्रिपाठी ने निदेशक पैरामेडिकल, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के साथ ही उप मुख्यमंत्री के यहां प्रेषित पत्र में स्थानांतरण नीति का हवाला देते हुए अब तक उक्त चीफ फार्मासिस्ट बस्ती, अजय कुमार मिश्र के एक ही जिले में बने रहने पर सवाल खड़ा किया है। शिकायत में कहा गया कि तमाम जांचों व कदाचार के मामले साबित होने के बाद भी आखिर दोषी व्यक्ति को कौन बचा रहा है और पोषित कर रहा है।