रविवार, 12 अप्रैल 2026

सुरों की दुनिया को गहरा सदमा: आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन।।

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सुरों की दुनिया को गहरा सदमा: आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन।।

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक/ नोएडा/मुंबई। भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपनी मधुर और बहुमुखी आवाज से सात दशकों तक श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाली दिग्गज गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने रविवार को अंतिम सांस ली। उनके निधन से संगीत प्रेमियों और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

जानकारी के अनुसार, शनिवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज यूनिट में उनका इलाज चल रहा था। दुनियाभर के प्रशंसक उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे थे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। परिवार की ओर से उनके बेटे आनंद भोसले ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की है।

सीने में संक्रमण बना कारण

परिवार से मिली जानकारी के मुताबिक, आशा भोसले को अत्यधिक थकावट और सीने में संक्रमण की शिकायत थी। उनकी पोती जनाई भोसले ने सोशल मीडिया के जरिए उनकी सेहत की जानकारी साझा करते हुए लोगों से निजता बनाए रखने की अपील भी की थी। जैसे ही उनके अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आई, अस्पताल और उनके आवास के बाहर फैंस की भीड़ जुटने लगी थी। सभी को उम्मीद थी कि वह स्वस्थ होकर लौटेंगी, लेकिन यह उम्मीद अधूरी रह गई।

अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार

स्वर सम्राज्ञी का पार्थिव शरीर सोमवार सुबह 11 बजे मुंबई के लोअर परेल स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद शाम 4 बजे शिवाजी पार्क, दादर में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसी स्थान पर उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर का भी अंतिम संस्कार हुआ था।

संघर्ष से शिखर तक का सफर

8 सितंबर 1933 को जन्मीं आशा भोसले एक संगीत परिवार से ताल्लुक रखती थीं। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और अभिनेता थे। मात्र नौ वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार पर जिम्मेदारियों का बोझ आ गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और संगीत को ही अपना जीवन बना लिया।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ (1943) से की, जिसमें उन्होंने ‘चला चला नाव वाला’ गीत गाया। हिंदी सिनेमा में उनका पहला गीत 1948 की फिल्म ‘चुनरिया’ का ‘सावन आया’ था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और हजारों गीतों को अपनी आवाज दी।

एक युग का अंत

आशा भोसले ने न सिर्फ हिंदी, बल्कि मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी समेत कई भाषाओं में गीत गाकर अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज में रोमांस, ग़ज़ल, पॉप, भजन और शास्त्रीय संगीत का अनूठा संगम देखने को मिलता था।

उनके निधन के साथ ही भारतीय संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है। उनकी आवाज, उनके गीत और उनकी विरासत हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।।