शनिवार, 18 अप्रैल 2026

गौतमबुद्धनगर: ई-साइकिल परियोजना फेल: 4 साल बाद एजेंसी पर गिरी गाज, अनुबंध रद्द, जुर्माना और ब्लैकलिस्टिंग!!

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गौतमबुद्धनगर: ई-साइकिल परियोजना फेल: 4 साल बाद एजेंसी पर गिरी गाज, अनुबंध रद्द, जुर्माना और ब्लैकलिस्टिंग!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//नोएडा, नोएडा में बहुप्रचारित ई-साइकिल परियोजना आखिरकार अपनी विफलता के कारण कठघरे में आ गई है। करीब चार साल तक अपेक्षित परिणाम न देने के बाद नोएडा प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाते हुए ई-साइकिल संचालन करने वाली एजेंसी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने एजेंसी का अनुबंध समाप्त कर दिया है, साथ ही ₹2 लाख का जुर्माना लगाया गया है और एजेंसी को एक वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया है।

दरअसल, शहर में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ई-साइकिल योजना जमीन पर सफल नहीं हो सकी। योजना के तहत विभिन्न स्थानों पर बनाए गए साइकिल स्टैंड अधिकांश समय खाली ही पाए गए, जिससे साफ हो गया कि परियोजना का संचालन प्रभावी ढंग से नहीं किया जा रहा था।

प्राधिकरण द्वारा किए गए निरीक्षण में कई गंभीर खामियां सामने आईं। जांच के दौरान पाया गया कि एजेंसी न तो पर्याप्त संख्या में साइकिलें उपलब्ध करा पाई और न ही उनके रखरखाव पर ध्यान दिया गया। कई स्थानों पर स्टैंड तो बने थे, लेकिन वहां साइकिलों का नामोनिशान तक नहीं था। इससे परियोजना की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो गए।

इसके अलावा एजेंसी पर यह भी आरोप लगे हैं कि उसने नियमों में बदलाव करने के लिए विज्ञापन का सहारा लिया, जो अनुबंध की शर्तों के खिलाफ था। जांच में इन अनियमितताओं और लापरवाही की पुष्टि होने के बाद प्राधिकरण ने कार्रवाई करते हुए सख्त संदेश दिया है कि सार्वजनिक योजनाओं में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि शहरवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है और जो भी एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सही ढंग से नहीं करेंगी, उनके खिलाफ इसी तरह की कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

ई-साइकिल योजना की विफलता ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शहर में शुरू की जाने वाली महत्वाकांक्षी योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन में कहां कमी रह जाती है। फिलहाल प्राधिकरण अब इस परियोजना को नए सिरे से शुरू करने या किसी नई एजेंसी को जिम्मेदारी देने पर विचार कर सकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित न रह जाएं।।