मऊ :
सांसद राजीव राय ने रेलवे जंक्शन के लिए 21 करोड़ रुपए कराया पास,
बनेगी 3 नई स्टेबलिंग लाइन, भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन का रास्ता हुआ साफ।
।।देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक : मऊ जंक्शन के विकास के लिए सांसद राजीव राय का संघर्ष रंग लाया और ₹21 करोड़ का विकास बजट स्वीकृत कराया और मऊ में 3 नई स्टेबलिंग लाइन बनेगी जिससे भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन का रास्ता साफ हुआ है।
दुष्यंत कुमार जी की ये पंक्तियां सटीक बैठती हैं,
“कौन कहता है कि आसमान में सुराख़ नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।”
विस्तार :
घोसी लोकसभा के सांसद राजीव राय द्वारा व्यक्तिगत रूप से मिलकर तथा सदन में बार-बार रेलमंत्री जी से मऊ से विभिन्न ट्रेनों के संचालन, तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं की माँग के परिणामस्वरूप रेलमंत्री ने मऊ जंक्शन को 21 करोड़ रुपये स्वीकृत किया, जो घोसी लोकसभावासियों के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।
सांसद राजीव राय के प्रयास से घोसी लोकसभा के लिए-
▪️ #मऊ जंक्शन को मिले 21 करोड़।
▪️ 3 नई स्टेबलिंग लाइन बनेगी।
▪️ ट्रेनों की पार्किग कैपेसिटी बढ़ेगी।
मऊ, उत्तर प्रदेश मऊ जनपद के सर्वांगीण विकास और रेल यात्रियों की सुविधाओं के लिए सदन (लोकसभा) में लगातार आवाज उठाने और रेल मंत्रालय से निरंतर मांग करने का प्रयास अंततः रंग लाया है। घोसी लोकसभा सांसद राजीव राय की इस सक्रियता का परिणाम है कि रेल मंत्रालय ने मऊ जंक्शन के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए 21 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है।
पार्किंग और स्टेबलिंग की समस्या का होगा स्थायी समाधान
इस विशेष बजट के माध्यम से मऊ जंक्शन पर रेल परिचालन को सुगम बनाने के लिए 3 नई स्टेबलिंग लाइन (Stabling Lines) का निर्माण किया जाएगा। वर्तमान में मऊ जंक्शन पर ट्रेनों के ठहराव और उनके रखरखाव के लिए पर्याप्त स्थान न होने के कारण कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, जिसे सांसद ने सदन के पटल पर प्रमुखता से रखा था।
नई स्टेबलिंग लाइनों के बनने से होने वाले प्रमुख लाभ:
ट्रेनों की पार्किंग क्षमता: स्टेशन पर ट्रेनों को सुरक्षित खड़ा करने (पार्किंग) की क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी।
नई ट्रेनों की संभावना: पार्किंग क्षमता बढ़ने से भविष्य में मऊ से नई लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
परिचालन में सुधार: ट्रेनों के इंजन बदलने और रैक के रखरखाव में लगने वाले समय की बचत होगी, जिससे ट्रेनों की लेटलतीफी कम होगी।
