रविवार, 29 मार्च 2026

मऊ :बौद्ध नैतिकता का आधार है पंचशील सिद्धांत है भिक्खू चंद्रिमा थेरो।।||Mau:The Panchsheel principles form the foundation of Buddhist ethics — Bhikkhu Chandrima Thero.||

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मऊ :
बौद्ध नैतिकता का आधार है पंचशील सिद्धांत है भिक्खू चंद्रिमा थेरो।।
।। देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक : मऊ जनपद के कोपागंज मे रविवार को बापू इंटर कालेज के पास खेल मैदान में आयोजित जिलास्तरीय धम्म महासम्मेलन का आयोजन किया गय। धम्स सम्मेलन में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आये हजारों बौद्ध अनुयाई और बौद्ध उपसक ,बौद्ध भिक्षु मौजूद थे। सम्मेलन में वक्ताओं ने धम्स के मूल उद्देश्य  पर प्रकाश डाला। 
 विस्तार :
जिला स्तरीय धम्म महासम्मेलन में मुख्य अतिथि रहे पूज्य भिक्खू चंद्रिमा थेरो जी को  जनपद मऊ के बसपा जिला अध्यक्ष ने महात्मा बुद्ध की मोमेंटो भेंट किया भिक्खू चंद्रिमा थेरो जी नेशांति का उपदेश देते हुए कहा पंचशील बौद्ध नैतिकता का आधार है. हम अपने बुरे व्यवहार को पहचानने और उसे रोकने का प्रयास करके नैतिकता की शुरुआत करते हैं. यह पांच उपदेश इसी के लिए हैं. जब हम बुरा करना बंद कर देते हैं, तब हम अच्छा करना शुरू करते हैं. बुद्ध कहते हैं कि पहले हमें झूठ बोलने से बचना चाहिए. इसके बाद हमें सच बोलना चाहिए. इसके बाद धीरे और नम्रता से बोलना चाहिए और सही समय पर बोलना चाहिए.
पंचशील के उपदेश स्वेच्छा से लिए जाते हैं, आमतौर पर एक औपचारिक समारोह में. अभिसंद सुत्त में, बुद्ध ने पांच उपदेशों को पांच महान उपहार कहा है. पंचशील सिद्धांत अष्टांगिक मार्ग के सम्यक भाषण, सम्यक कार्य और सम्यक आजीविका के अंतर्गत आते हैं. एकाग्रता और ज्ञान को बढ़ाने के लिए आवश्यक शर्तें हैं.
उपदेशों को बनाये रखने के अभ्यास से, हम अपने शरीर और वाणी के प्रति अधिक चौकस होते हैं, जिससे हम मानसिक शांति और स्पष्टता की ओर अग्रसर होते हैं और अंततः, पीड़ा से मुक्ति मिलती है. पंचशील-जीवित प्राणियों की हत्या, चोरी, यौन दुर्व्यवहार, झूठ और नशे से दूर रहने की प्रतिबद्धता है. बौद्ध सिद्धांत के भीतर, उनका उद्देश्य आत्मज्ञान के मार्ग पर प्रगति करने के लिए मन और चरित्र का विकास करना है. पंच उपदेश सामान्य अभ्यासियों के लिए बुद्ध द्वारा सिखाये गये बुनियादी नैतिक दिशा-निर्देश हैं.
पंचशील के पालन से क्या लाभ होते हैं?पंचशील का पालन करने से व्यक्ति अपने शरीर और वाणी के प्रति अधिक चौकस होता है, जिससे मानसिक शांति, स्पष्टता और अंततः पीड़ा से मुक्ति प्राप्त होती है.
पंचशील क्या है?पंचशील बौद्ध धर्म में नैतिकता का आधार है, जो पाँच मुख्य उपदेशों पर आधारित है: जीव हत्या से बचना, चोरी से बचना, यौन दुर्व्यवहार से बचना, झूठ बोलने से बचना, और नशे से दूर रहना.
बुद्ध ने पंचशील के उपदेशों के बारे में क्या कहा है?बुद्ध ने पंचशील के उपदेशों को “पाँच महान उपहार” कहा है और इन्हें आत्मज्ञान के मार्ग पर प्रगति करने के लिए मन और चरित्र के विकास के रूप में देखा है.
पंचशील के उपदेश कैसे ग्रहण किए जाते हैं?पंचशील के उपदेश स्वेच्छा से औपचारिक समारोह में लिए जाते हैं, जिसमें लोग बौद्ध नैतिकता के इन सिद्धांतों का पालन करने की प्रतिबद्धता जताते हैं.
पंचशील का अष्टांगिक मार्ग से क्या संबंध है?पंचशील के उपदेश अष्टांगिक मार्ग के सम्यक भाषण, सम्यक कार्य और सम्यक आजीविका के अंतर्गत आते हैं, जो ध्यान और ज्ञान को बढ़ाने के लिए आवश्यक शर्तें हैं. कि बौद्ध धर्म पूरे दुनिया में अनुशासन के लिए जाना जाता है । कहा कि अपने सूझ बूझ ,संयम ,सदाचार और सम्पूर्ण के रूप में बुद्धिष्ट जाना जाता है। मुख्य अतिथि ने कहा कि हमारे अंदर त्याग की भावना होनी चाहिए। कहां की यदि त्याग नहीं है तो हम जीवन में कुछ नहीं कर सकते। कहा कि समाज में समरसता , शांति और बंधुत्व की भावना जागृत करने के लिए बुद्ध की शिक्षाओं का प्रचार करना जरूरी है। कहा कि इन कार्यों के माध्यम से न केवल धर्म का प्रचार होगा बल्कि समाज में शांति और भाईचारे की भावना सुदृढ़ होगी। सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व डी आई ओ एस शिवचंद राम जी ने कहा कि आज के दौर में दुनिया को युद्ध नहीं बुद्ध के करूणा और शांति के मार्ग की आवश्यकता है। धर्म सम्मेलन में बसपा के जिला अध्यक्ष शैलेंद्र (सिंटू), प्रेमचंद,, बबलू यादव,  सहरोज गाव पूर्व प्रधान योगेश राय, बसपा के पू्र्व  सांसद के प्रतिनिधी गोपाल राय ,  घोसी के पूर्व ब्लाक प्रमुख  सुजीत सिंह,   फागू सिंह, कौशल, जितेंद्र गोयल  ,राम अवध राव, तारकेश्वर टंडन, अनिल चंद्र, सत्यम कुमार , सुशीला बौद्ध ,कविता ,रवि राज प्रीति बौद्ध, सपना भारती, सहित बहुजन समाज पार्टी के दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे।