गौतमबुद्धनगर: नोएडा में “डिजिटल अरेस्ट” का खौफनाक खेल: सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर से 1.29 करोड़ की साइबर ठगी !!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
नोएडा/ग्रेटर नोएडा, 18 मार्च 2026
दो टूक// नोएडा और ग्रेटर नोएडा में साइबर अपराधियों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामले में ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर एक 72 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर से करीब 1 करोड़ 29 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में मैनेजर रह चुके हैं और सूरजपुर क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।
कैसे रची गई ठगी की पूरी साजिश
जानकारी के अनुसार, 6 फरवरी को पीड़ित को एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को TRAI (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का अधिकारी बताया। उसने कहा कि पीड़ित के नाम पर जारी एक सिम कार्ड का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में हो रहा है।
कुछ ही देर बाद ठगों ने वीडियो कॉल किया, जिसमें एक व्यक्ति जज की कुर्सी पर बैठा दिखा, जबकि दूसरा पुलिस वर्दी में नजर आया। पूरा माहौल बिल्कुल कोर्ट जैसा बनाया गया, जिससे पीड़ित को लगा कि वह सच में किसी कानूनी कार्रवाई का हिस्सा है।
“डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर बनाया दबाव
ठगों ने पीड़ित से कहा कि उसे “डिजिटल अरेस्ट” किया गया है और जांच पूरी होने तक उसे उनके निर्देशों का पालन करना होगा। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उसे मानसिक रूप से इतना दबाव में ला दिया गया कि वह हर निर्देश मानने लगा।
15 दिन में कई किस्तों में ट्रांसफर कराए पैसे
साइबर जालसाजों ने “वेरिफिकेशन” और “जांच” के नाम पर पीड़ित से अलग-अलग तारीखों में रकम ट्रांसफर करवाई—
- 13 फरवरी: ₹51.95 लाख
- 19 फरवरी: ₹48.95 लाख
- 21 फरवरी: ₹10.95 लाख
- 25 फरवरी: ₹17.20 लाख
- 26 फरवरी: ₹56,962
👉 इस तरह कुल ₹1,29,61,962 रुपये ठगों के खातों में पहुंच गए।
फर्जी लेटर से दिलाया भरोसा
ठगी के बाद आरोपियों ने पीड़ित को सुप्रीम कोर्ट और मुंबई पुलिस के नाम से फर्जी लेटर भेजे और भरोसा दिलाया कि जांच के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा। लेकिन जब लंबे समय तक रकम वापस नहीं आई, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।
🏢 साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज
पीड़ित ने 12 मार्च को नोएडा के सेक्टर-36 स्थित साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस की अपील: ऐसे रहें सतर्क
पुलिस ने नागरिकों को सतर्क करते हुए कहा है—
- कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती
- कोर्ट, पुलिस या जांच एजेंसी कभी भी फोन पर पैसे ट्रांसफर नहीं कराती
- अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर डरकर कोई भी वित्तीय जानकारी साझा न करें
- संदेह होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने से संपर्क करें
बढ़ रहा है “डिजिटल अरेस्ट” फ्रॉड का ट्रेंड
नोएडा-एनसीआर में इस तरह के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जहां ठग हाई-टेक तरीके से नकली कोर्ट, पुलिस और सरकारी अधिकारियों का रूप धारण कर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।
निष्कर्ष:
यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी अब मनोवैज्ञानिक दबाव और तकनीकी धोखे का इस्तेमाल कर बड़े से बड़े लोगों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
