गोण्डा- कलेक्ट्रेट परिसर से “बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वासन” विषयक जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा कि बाल श्रम एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जिसके उन्मूलन के लिए शासन एवं प्रशासन द्वारा सतत प्रयास किए जा रहे हैं। जागरूकता रथ के माध्यम से जिले के विभिन्न विकासखंडों, ग्राम पंचायतों एवं शहरी क्षेत्रों में जाकर आमजन को बाल श्रम के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों तथा बच्चों के पुनर्वासन संबंधी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) संशोधित अधिनियम, 2016 के अंतर्गत बाल श्रम कराना दंडनीय अपराध है। रथ के माध्यम से पंपलेट, पोस्टर एवं ऑडियो संदेशों के जरिए लोगों को जागरूक किया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और उसे सुरक्षित एवं स्वस्थ बचपन मिल सके।
रथ को रवाना करने के उपरांत कलेक्ट्रेट सभागार में “बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वासन” विषय पर बैठक आयोजित की गई। बैठक में श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें तत्काल श्रम से मुक्त कराया जाए तथा उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए पुनर्वासन योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।
बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि समय समय पर संयुक्त निरीक्षण अभियान चलाकर होटल, ढाबा, कारखाना एवं अन्य प्रतिष्ठानों की जांच की जाए। साथ ही आमजन से अपील की गई कि यदि कहीं भी बाल श्रम की सूचना मिले तो तत्काल संबंधित विभाग को सूचित करें।
जिला प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि बाल श्रम के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा और बच्चों के अधिकारों की रक्षा हेतु कठोर कार्रवाई की जाएगी।
