गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

गौतमबुद्धनगर: अमेरिका–भारत व्यापार समझौते के विरोध में जिला मुख्यालय पर किसानों का प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन!!

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गौतमबुद्धनगर: अमेरिका–भारत व्यापार समझौते के विरोध में जिला मुख्यालय पर किसानों का प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक// गौतमबुद्ध नगर। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले आज जिला मुख्यालय पर सैकड़ों किसानों ने प्रदर्शन कर अमेरिका–भारत व्यापार समझौते के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की। संगठन के जिला अध्यक्ष रॉबिन नागर के नेतृत्व में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अनुराग सारस्वत को माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।

जिला अध्यक्ष रॉबिन नागर ने कहा कि 12 फरवरी 2026 को देशभर में किसान संगठन धरना-प्रदर्शन कर इस समझौते को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह समझौता किसानों की सहमति के बिना लाया गया है और इससे देश के करोड़ों किसानों के हित प्रभावित होंगे।

रॉबिन नागर बोले—किसानों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

जिला अध्यक्ष रॉबिन नागर, जो लंबे समय से किसानों के हक और अधिकारों की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं, ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन हमेशा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किसानों की आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाती रही है।
उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान है और किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले किसानों की राय लेना अनिवार्य होना चाहिए।

रॉबिन नागर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने किसानों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल व्यापार की नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य, ग्रामीण रोजगार और खाद्य सुरक्षा की है।

ज्ञापन में उठाए गए प्रमुख बिंदु

1️⃣ सस्ती विदेशी उपज से संकट

अमेरिका की खेती भारी सब्सिडी और बड़े कॉर्पोरेट मॉडल पर आधारित है। यदि आयात शुल्क घटाया गया तो सस्ती विदेशी फसल भारतीय मंडियों में आएगी, जिससे स्थानीय किसान प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं।

2️⃣ डेयरी क्षेत्र पर खतरा

अमेरिकी डेयरी उत्पादों के प्रवेश से छोटे और सीमांत दुग्ध उत्पादकों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका जताई गई।

3️⃣ एमएसपी और खाद्य सुरक्षा पर असर

कृषि सब्सिडी और सार्वजनिक खरीद प्रणाली पर दबाव बढ़ने से एमएसपी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली कमजोर हो सकती है।

4️⃣ बीजों पर कॉर्पोरेट नियंत्रण

पेटेंट आधारित बीज व्यवस्था से पारंपरिक बीज संरक्षण प्रणाली प्रभावित होने की आशंका जताई गई।

अन्य नेताओं ने भी रखे विचार

जिला मीडिया प्रभारी सुनील प्रधान ने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार का मामला नहीं, बल्कि किसान की आय और राष्ट्रीय आर्थिक स्वायत्तता का प्रश्न है।


युवा जिला अध्यक्ष ललित चौहान ने कहा कि युवा किसान इस मुद्दे पर पूरी तरह सजग हैं और किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।

इस अवसर पर धर्मपाल स्वामी, धर्मेंद्र राजमल, विनोद पंडित, इंद्रीश चेची, लाला यादव, अमित डेढ़ा, सचिन, गजराज भाटी, अरविंद लोहिया, सत्य भाटी, योगेश भाटी सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।

प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और प्रशासन ने ज्ञापन को शासन स्तर तक भेजने का आश्वासन दिया। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगा।