गौतमबुद्धनगर: नोएडा प्राधिकरण में ट्रांसफर नीति पर सवाल: वरिष्ठ प्रबंधक (सिविल) सतेंद्र गिरी एक दशक से जमे, आदेश के बावजूद नहीं संभाला नया पद!!
दो टूक:: नोएडा। नोएडा प्राधिकरण में तैनाती और तबादला नीति को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। वरिष्ठ प्रबंधक (सिविल) सतेंद्र गिरी का नाम इन दिनों चर्चा में है। जानकारी के अनुसार वह एक दशक से अधिक समय से प्राधिकरण में विभिन्न महत्वपूर्ण और कथित तौर पर ‘मलाईदार’ विभागों में तैनात रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक सतेंद्र गिरी ने प्राधिकरण में जेई, असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर, प्रोजेक्ट इंजीनियर से लेकर वर्तमान में सीनियर मैनेजर (सिविल) तक का लंबा कार्यकाल यहीं बिताया है। इस दौरान वह वर्क सर्किल–3, हेल्थ विभाग, वर्क सर्किल–9 समेत कई अहम पदों पर तैनात रहे।
ट्रांसफर के बाद भी नहीं किया पद ग्रहण
बताया जा रहा है कि 27 जनवरी 2026 को शासन स्तर से उनका ट्रांसफर नोएडा से यूपीसीडा (UPSIDC/UPSIDA) में किया गया था। हालांकि, आदेश जारी होने के बाद भी उन्होंने वहां पदभार ग्रहण नहीं किया। इसे लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं।
सूत्रों का दावा है कि पूर्व में भी कई बार उनका स्थानांतरण हुआ, लेकिन प्रभाव और अंदरूनी सेटिंग के चलते आदेश प्रभावी नहीं हो पाए। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
अतिक्रमण पर नरमी के आरोप
कुछ स्थानीय सूत्रों का यह भी आरोप है कि शहर में अवैध अतिक्रमण के मामलों में संबंधित विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संपत्ति को लेकर भी चर्चा
सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर क्षेत्र में कथित तौर पर करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने को लेकर चर्चाएं हैं। फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ट्रांसफर पॉलिसी पर उठे सवाल
शासन की ट्रांसफर नीति के बावजूद लंबे समय तक एक ही प्राधिकरण में तैनाती को लेकर प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यदि आदेश जारी होने के बाद भी अधिकारी पदभार ग्रहण नहीं करते हैं तो यह व्यवस्था की गंभीरता पर प्रश्न खड़ा करता है।
इस पूरे मामले में प्राधिकरण या शासन स्तर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है। यदि जांच या स्पष्टीकरण आता है तो तस्वीर और साफ हो सकेगी।
(यह खबर उपलब्ध दस्तावेजों और सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर प्रकाशित किया जाएगा।)
