गौतमबुद्धनगर: मुफ्त व्यापार समझौते के विरोध में सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर किसानों का उग्र प्रदर्शन, अशोक भाटी के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा!!
दो टूक// नोएडा। संयुक्त किसान मोर्चा एवं भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय आह्वान पर अमेरिका–भारत मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के विरोध में मंगलवार को नोएडा सेक्टर–19 स्थित सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष श्री अशोक भाटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने एकत्र होकर समझौते की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया और केंद्र सरकार से इसे तत्काल रद्द करने की मांग की।
प्रदर्शन के बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट श्री अरविंद मिश्रा के साथ बैठक कर किसानों की समस्याओं और आशंकाओं को विस्तार से रखा। तत्पश्चात माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।
अशोक भाटी बोले—यह केवल व्यापार नहीं, किसानों के भविष्य का सवाल
जिला अध्यक्ष अशोक भाटी ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और यदि कृषि क्षेत्र कमजोर हुआ तो देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यापार समझौते में किसानों की राय नहीं ली गई और यह समझौता छोटे एवं सीमांत किसानों के हितों के विरुद्ध है।
अशोक भाटी, जो लंबे समय से किसानों के अधिकारों और स्थानीय मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं, ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन हर स्तर पर किसानों की आवाज उठाती रहेगी और यदि आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
सचिन अवाना ने उठाए एमएसपी और डेयरी के मुद्दे
प्रदर्शन में उपस्थित वरिष्ठ किसान नेता सचिन अवाना ने कहा कि भारतीय किसान पहले से ही एमएसपी की गारंटी और बढ़ती लागत के संकट से जूझ रहा है। ऐसे में सस्ती विदेशी कृषि उपज का आयात किसानों को प्रतिस्पर्धा में कमजोर कर देगा।
उन्होंने विशेष रूप से डेयरी क्षेत्र पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत का डेयरी मॉडल छोटे किसानों और सहकारी समितियों पर आधारित है, जिसे विदेशी उत्पादों की खुली एंट्री से बड़ा नुकसान होगा।
किसानों के प्रमुख तर्क
1️⃣ सस्ती विदेशी उपज से भारतीय किसान प्रभावित
अमेरिका की खेती भारी सब्सिडी और बड़े कॉर्पोरेट फार्म मॉडल पर आधारित है। यदि भारत आयात शुल्क घटाता है, तो सस्ती अमेरिकी फसल भारतीय मंडियों में पहुंचेगी, जिससे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान होगा।
2️⃣ डेयरी सेक्टर पर खतरा
अमेरिकी डेयरी उत्पादों के प्रवेश से लाखों दुग्ध उत्पादक परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है।
3️⃣ एमएसपी और खाद्य सुरक्षा पर संकट
किसान संगठनों का कहना है कि व्यापार संतुलन के नाम पर कृषि सब्सिडी और सार्वजनिक खरीद प्रणाली पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे एमएसपी और पीडीएस व्यवस्था कमजोर हो सकती है।
4️⃣ बीजों पर कॉर्पोरेट नियंत्रण की आशंका
पेटेंट आधारित बीज और बौद्धिक संपदा अधिकार के माध्यम से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नियंत्रण बढ़ने की आशंका जताई गई, जिससे पारंपरिक बीज संरक्षण की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
इन नेताओं की रही उपस्थितिप्रदर्शन में श्रीपाल कसाना, मनोज त्यागी, जोगिंदर भड़ाना, विजेंद्र भड़ाना, संजय फौजी, सिंहराज गुर्जर, दीपक भाटी, रविंद्र भगतजी, अजय गुर्जर, मनोज शर्मा, हरेंद्र चौधरी, सतपाल अवाना, अनिल अवाना, रामवीर हवलदार, राकेश अवाना, कालूराम भाटी, राजकुमार सहित अनेक किसान नेता उपस्थित रहे।
साथ ही पुलिस प्रशासन एवं एलआईयू की ओर से सब-इंस्पेक्टर राहुल शर्मा, पुष्पेंद्र यादव, शालिनी करनवाल और विक्रांत चौधरी भी मौजूद रहे।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन ने स्पष्ट किया कि यह समझौता केवल व्यापार का विषय नहीं बल्कि किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार, खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय आर्थिक स्वायत्तता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर और तेज किया जाएगा।
जय जवान, जय किसान के नारों के साथ प्रदर्शन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
