मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

लखनऊ :डिजिटल अरेस्ट कर 90 लाख की ठगी करने वाले तीन अपराधी गिरफ्तार।||Lucknow:Three criminals arrested for cheating people of Rs 90 lakh through digital arrest.||

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लखनऊ :
डिजिटल अरेस्ट कर 90 लाख की ठगी करने वाले तीन अपराधी गिरफ्तार।
फर्जी एटीएस आफिसर बनकर व्हाट्सएप काल कर बनाते है शिकार।
दो टूक : राजधानी लखनऊ की साइबर पुलिस टीम ने एटीएस अधिकारी बनकर 
आतंकवाद एवं मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराधों से भयभीत कर दम्पति को डिजिटल अरेस्ट कर 90 लाख रुपए की ठगी करने वाले तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी मिली।
विस्तार
डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने जानकारी देते हुए बताया 26 जनवरी 2026 को आलमबाग निवासी राकेश बाजपेई की पत्नी वीना बाजपेई के मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस मुख्यालय में तैनात इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया। उसने आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगाकर गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके बाद सिग्नल ऐप डाउनलोड कराया गया। जहां अजय प्रताप श्रीवास्तव नाम के व्यक्ति ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर संपर्क किया। आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश और सीजर दस्तावेज दिखाकर कहा कि गिरफ्तारी से बचने और खातों की जांच के लिए रुपए दूसरे खातों में ट्रांसफर करने होंगे। दबाव में आकर दंपती ने 29 जनवरी से 9 फरवरी के बीच अलग-अलग खातों में करीब 90 लाख रुपए भेज दिए। बाद में 11 लाख रुपए और मांगे गए। मना करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई। तब ठगी की जानकारी हुई तो साइबर क्राइम थाने मे तहरीर देते हुए शिकायत किया। घटना का खुलासा करने के लिए साइबर क्राइम थाना लखनऊ के प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार यादव के नेतृत्व में टीम गठित की गई। इस टीम ने घटना का सफल अनावरण करते हुए तीन शातिर साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया।


पूछताछ के दौरान गिरफ्तार मयंक श्रीवास्तव ने स्वीकार किया कि वह आर्थिक तंगी एवं कर्ज के कारण इरशाद के संपर्क में आया। इरशाद द्वारा उसे बताया गया कि यदि वह अपना चालू बैंक खाता उपलब्ध कराएगा तो उसे कमीशन दिया जाएगा। इसी क्रम में दिनांक 07.02.2026 को उसे दिल्ली बुलाकर पहाड़गंज स्थित एक होटल में ठहराया गया, जहाँ उसकी मुलाकात इरशाद, आकाश उर्फ मनीष तथा जीतू उर्फ जीतेन्द्र से कराई गई और उसके मोबाइल फोन का पासवर्ड प्राप्त कर उसका उपयोग किया गया। 
दिनांक 08.02.2026 को उसे चांदनी चौक के पास स्थित इम्पीरियल होटल में तथा बाद में नोएडा के कन्हैया रेजीडेंसी (परी चौक के पास) में ठहराया गया। जहाँ अभियुक्तों ने उसके मोबाइल फोन के माध्यम से साइबर फ्रॉड से संबंधित करोडो के लेन-देन संचालित किए। इसके बदले उसे ₹10,000 नकद प्रदान किए गए तथा ₹2,00,000 देने का आश्वासन दिया गया। अभियुक्तों ने उसकी ICICI एवं HDFC बैंक की चेकबुक तथा ICICI डेबिट कार्ड अपने कब्जे में ले लिए। मयंक ने यह भी बताया कि वह अन्य अभियुक्तों की पहचान करवा सकता है। इसी क्रम में अभियुक्त इरशाद ने स्वीकार किया कि वह 3% कमीशन पर आकाश उर्फ मनीष एवं जीतू उर्फ जीतेन्द्र के लिए कार्य करता है तथा खाताधारकों को धन के लालच में फँसाकर उनके बैंक खाते, चेकबुक एवं डेबिट कार्ड प्राप्त करता था। वह व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से गिरोह के अन्य सदस्यों से संपर्क बनाए रखता था तथा उसने आकाश एवं जीतू के मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराए। पूछताछ में उसने अन्य अभियुक्तों को पकड़वाने में सहयोग करने की सहमति व्यक्त की।
अभियुक्त आकाश उर्फ मनीष ने भी स्वीकार किया कि वह जीतू उर्फ जीतेन्द्र के लिए कार्य करता है तथा साइबर फ्रॉड से प्राप्त धनराशि में उसे 3% कमीशन किश्तों में प्राप्त होता था। उसने यह स्वीकार किया कि मयंक की सहमति से उसकी चेकबुक एवं डेबिट कार्ड अपने कब्जे में लिए गए थे। बरामदगी के दौरान मयंक की दोनों चेकबुक एवं डेबिट कार्ड अभियुक्त आकाश उर्फ मनीष के कब्जे से प्राप्त हुए, जिससे उसकी संलिप्तता प्रथम दृष्टया प्रमाणित होती है।

अभियुक्त के उपरोक्त खाते में दिनांक 09-02-2026 को ठगी के 1,06,30,000/- रूपए आये है, जिन्हें NCCRP पोर्टल पर चेक किये जाने पर तमिलनाडु व अन्य कई राज्यों से शिकायत दर्ज पाया गया ।
गिरोह योजनाबद्ध तरीके से "डिजिटल अरेस्ट" साइबर फ्रॉड को  प्रकार अंजाम दिया जाता था
खाताधारक की तलाश
आर्थिक रूप से कमजोर अथवा कर्जग्रस्त व्यक्तियों को चिन्हित किया जाता था।
उन्हें कमीशन व त्वरित आय का लालच देकर अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया जाता था।
इस गिरोह की एक टीम खाताधारक की चेकबुक, डेबिट कार्ड एवं मोबाइल फोन का पासवर्ड प्राप्त किया जाता था।खाताधारक को होटल,अन्य स्थानों पर रोककर रखा जाता था। पैसा मिलने के उपरांत फरारहो जाते थे।
●डिजिटल अरेस्ट कर ठगी का तरीका।
पीड़ित व्यक्तियों को स्वयं को पुलिस, सीबीआई,अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बता कर कॉल किया जाता था।
उन्हें मनी लॉन्डिंग,गंभीर अपराध में फँसाने की धमकी दी जाती थी और डराकर उनसे बड़ी धनराशि निर्दिष्ट खातों में ट्रांसफर करा लेते थे ।
फ्राड की धनराशि का वितरण।
पीड़ित से प्राप्त धन प्रथम लेयर खाताधारक (जैसे मयंक) के खाते में जमा कराया जाता था। तत्पश्चात धन को अन्य खातों में ट्रांसफर या नकद निकासी के माध्यम से विभाजित किया जाता था। गिरोह के सदस्यों में पूर्व निर्धारित प्रतिशत (2%-5%) के अनुसार बांट दिया जाता था।
पहचान छिपाने की रणनीति। 
गिरफ्तार शातिर आपस मे केवल व्हाट्सएप कॉल का उपयोग करते है फर्जी नामों का प्रयोग कर अलग-अलग शहरों में अस्थायी होटल में रुकना और रणनीति के तहत बार-बार स्थान परिवर्तन कर देते थे।
व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से गिरोह के अन्य सदस्यों से संपर्क।खाताधारक के मोबाइल से OTP, बैंकिंग लेन-देन एवं डिजिटल ट्रांजेक्शन संचालित किए जाते थे।

बरामद की गई सामग्रीः
03 अदद मोबाइल फ़ोन , 01 अदद ICICI बैंक की चेक बुक ,01 अदद HDFC बैंक कि चेक बुक,01 अदद बैंक डेबिट कार्ड ICICI बैंक |

गिरफ्तार अभियुक्त का विवरण :
1. मयंक श्रीवास्तव पुत्र राकेश कुमार श्रीवास्तव (स्व०), स्थायी पता यू०एस० अकादमी स्कूल के पीछे, जंगल धुसड़, निषाद चौराहा, थाना पिपराइच, जनपद गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, उम्र- 24 वर्ष |
2. इरशाद पुत्र बबलू पता - ग्राम खिन्दोड़ा, थाना निवाड़ी, जनपद गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश, उम्र 23 वर्ष |
3. मनीष कुमार उर्फ आकाश पुत्र राजेश कुमार, पता- मकान संख्या 30/17, रानीखेड़ा, भाग्य विहार, थाना प्रेमनगर,
मुंडका, दिल्ली, उम्र 24 वर्ष |