सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

लखनऊ : भीषण हादसे मे दो दर्जन घायलों में 5 की मौत के बाद सड़क की हो रही सफाई।||Lucknow: Roads are being cleaned after five people died among two dozen injured in a horrific accident.|

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लखनऊ : 
भीषण हादसे मे दो दर्जन घायलों में 5 की मौत के बाद सड़क की हो रही सफाई।
दो टूक : राजधानी लखनऊ में थाना गोसाईगंज क्षेत्र पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना के महज़ दो घंटे बाद ही सड़क ऐसी चमकाई गई, मानो वहां कभी कुछ हुआ ही न हो। डामर पर पानी डाला गया, खून के निशान धो दिए गए, मलबा हटाकर दूर फेंक दिया गया। ताकि तस्वीर साफ़ दिखे, सवाल नहीं।
विस्तार :
डबल डेकर बस हादसे मे यात्रियों की मौत के बाद स्वच्छता अभियान व्यवस्था की फुर्ती देखिए  हादसा रोकने में सुस्त सिस्टम लेकिन हादसे के सबूत मिटाने में बिजली-सी भु तेज काम हुआ तारीफ के काबिल है
लगता है हमारी संवेदनाएँ भी अब स्वच्छता अभियान का हिस्सा बन गई है जहाँ दाग दिखें, तुरंत मिटा दो चाहे वो सड़क पर हों या सिस्टम पर।
हादसे के बाद लहूलुहान लाशें उठ गईं, जाम खुल गया, ट्रैफिक फिर से दौड़ने लगी। अख़बार में दो कॉलम, सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट और फिर सब सामान्य। लेकिन उन पाँच ज़िंदगियों का क्या, जिनके घरों में अब सन्नाटा स्थायी मेहमान बन गया? क्या वहाँ भी कोई टीम भेजी जाएगी,जो मातम को पोंछकर दीवारें चमका दे? सड़क तो चमक गई, पर क्या ज़मीर भी उतनी ही आसानी से पॉलिश हो जाता है? मलबा हट गया, पर क्या लापरवाही भी हट गई? कहीं ऐसा तो नहीं कि हमें हादसों से ज़्यादा उनकी साफ-सफाई की आदत पड़ गई है। क्योंकि सच से सामना करना खून के धब्बे धोने से कहीं ज़्यादा मुश्किल काम है। 
फिलहाल सफाई कर्मचारियों की तारीफ बनती है उन्होंने अपने अपने कर्तव्य का ईमानदारी से पालन किया। लेकिन उन सिस्टम को क्या कहे जिनकी वजह से आए दिन हादसे हो रहे है चाहे जिम्मेदार सस्थान हो व गैर जिम्मेदाराना जनता हो, सड़क दुर्घटना एक भीषण समस्या है जहाँ आए दिन हो रही मौतें चिंता का विषय है।