गौतमबुद्धनगर: ग्रेटर नोएडा के दलेलगढ़ में दर्दनाक हादसा: 3 वर्षीय मासूम की गड्ढे में डूबने से मौत, जिम्मेदारी पर उठे सवाल!!
दो टूक//ग्रेटर नोएडा। बिलासपुर क्षेत्र के निकट स्थित दलेलगढ़ गांव में शनिवार को एक बेहद दर्दनाक हादसे में तीन वर्षीय मासूम की पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक की लहर है, वहीं जमीन की जिम्मेदारी को लेकर ग्रामीणों, प्रशासन और प्राधिकरण के बीच सवाल खड़े हो गए हैं।
धार्मिक अनुष्ठान में आया था मासूम, खेलते-खेलते हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार दलेलगढ़ निवासी अनिल ठाकुर की बेटी अंजली की शादी सिकंदराबाद के सपौनी गांव निवासी राकेश से हुई है। गांव में डालेश्वर बाबा की समाधि पर अंजली के भाई देवेंद्र द्वारा 41 दिन का धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया था, जिसका शनिवार को अंतिम दिन था। इस अवसर पर भंडारे का आयोजन भी किया गया था।
इसी कार्यक्रम में अंजली अपने 3 वर्षीय बेटे देवांश के साथ शामिल होने आई थीं। दोपहर में भंडारे के दौरान देवांश अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। खेलते-खेलते वह पास ही मौजूद लगभग छह से सात फीट गहरे गड्ढे में जा गिरा, जिसमें बारिश और नालियों का पानी भरा हुआ था।
पानी में तैरती मिली टोपी, तब हुआ हादसे का खुलासा
कुछ देर तक देवांश नजर नहीं आया तो परिजन और ग्रामीण उसे ढूंढने लगे। इसी दौरान किसी की नजर समाधि स्थल के पास गड्ढे में भरे पानी में तैरती बच्चे की टोपी पर पड़ी। आशंका होते ही ग्रामीण तुरंत पानी में उतरे और बच्चे को बाहर निकाला। आनन-फानन में उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मासूम की मौत से समारोह स्थल पर मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जिम्मेदारी किसकी? जमीन को लेकर विवाद
ग्रामीणों का आरोप: पशुचर भूमि पर बना जानलेवा गड्ढा
ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर यह गड्ढा है, वह पशुचर (चरागाह) भूमि यानी सरकारी जमीन है। उनका आरोप है कि समय-समय पर यहां से मिट्टी निकाली जाती रही, जिससे यह गहरा गड्ढा बन गया। धीरे-धीरे इसमें बारिश और नालियों का पानी भरता गया और यह हादसों का कारण बन गया।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उन्होंने कई बार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से इस गड्ढे की तारबंदी कराने और सुरक्षा व्यवस्था की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्राधिकरण का दावा: भूमि निजी किसानों की
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जीएम एके सिंह के अनुसार जांच में पता चला है कि खसरा संख्या 373 की भूमि पर यह गड्ढा स्थित है और यह जमीन ग्रामीण गंगाराम व धर्मवीर के नाम दर्ज है। प्राधिकरण का कहना है कि भूमि निजी होने के कारण वह सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
प्रशासन ने किया निरीक्षण
घटना की सूचना मिलते ही सदर तहसीलदार, नायब तहसीलदार व लेखपाल मौके पर पहुंचे। रविवार को उप जिलाधिकारी ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।
एडीसीपी ग्रेटर नोएडा के अनुसार, अभी तक परिवार की ओर से कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल: कब भरेंगे ये ‘मौत के गड्ढे’?
दलेलगढ़ का यह हादसा प्रशासनिक जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। चाहे जमीन निजी हो या सरकारी, आबादी के बीच खुले और पानी से भरे गहरे गड्ढे किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकते हैं।
मासूम देवांश की असमय मौत ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। अब ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि गांव और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद ऐसे सभी खतरनाक गड्ढों की पहचान कर उन्हें तत्काल भरा जाए या उनकी घेराबंदी कराई जाए, ताकि भविष्य में कोई और मासूम इस तरह की लापरवाही का शिकार न बने।।
