मंगलवार, 6 जनवरी 2026

गौतमबुद्धनगर: दो दिन में दो बार ऑपरेशन, तीसरी बार डॉक्टर ने किया हाथ खड़े — निजी अस्पताल में निकले आंख से तीन लेंस!!

शेयर करें:

गौतमबुद्धनगर: दो दिन में दो बार ऑपरेशन, तीसरी बार डॉक्टर ने किया हाथ खड़े — निजी अस्पताल में निकले आंख से तीन लेंस!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक:: नोएडा।
नोएडा स्थित जिला अस्पताल से एक बार फिर चिकित्सा लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पीड़ित मरीज ने जिला अस्पताल के एक डॉक्टर पर आंख के ऑपरेशन में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। मरीज का कहना है कि उसकी एक ही आंख का दो बार ऑपरेशन कर दिया गया, जबकि तीसरी बार डॉक्टर ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि अब यह आंख ठीक नहीं हो सकती।

पीड़ित के अनुसार, आंख की समस्या को लेकर वह 18 नवंबर 2025 को नोएडा जिला अस्पताल पहुंचा था, जहां डॉक्टर द्वारा ऑपरेशन किया गया। लेकिन ऑपरेशन के बाद आंख में तेज दर्द और परेशानी बनी रही। इसके बाद 19 नवंबर 2025 को उसी आंख का दोबारा ऑपरेशन कर दिया गया। बावजूद इसके मरीज की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।

मरीज का आरोप है कि जब तीसरी बार वह अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर ने साफ तौर पर कह दिया कि अब इस आंख से कोई उम्मीद नहीं है। इतना ही नहीं, पीड़ित ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए बाहर से लेंस खरीदवाने को कहा, जो नियमों के पूरी तरह खिलाफ है।

स्थिति बिगड़ने पर मजबूरन पीड़ित ने एक निजी अस्पताल में इलाज कराया। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने जब आंख का ऑपरेशन किया तो आंख के भीतर से तीन लेंस निकले, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया। निजी अस्पताल की रिपोर्ट ने जिला अस्पताल में हुई कथित लापरवाही की पुष्टि जैसी स्थिति पैदा कर दी है।

मामला सामने आने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन हरकत में आया है। इस संबंध में जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) ने बयान जारी करते हुए कहा कि मरीज की शिकायत प्राप्त हुई है। जांच में यह भी सामने आया है कि मरीज का इलाज पूर्व में एम्स (AIMS) में भी चल चुका है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एक जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है।

CMS ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस घटना के बाद आमजन में सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर रोष और चिंता दोनों देखने को मिल रही है।

अब देखना यह होगा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।।