गौतमबुद्धनगर: पशु क्रूरता के साथ एनिमल एक्टिविस्ट्स पर हिंसा बढ़ी, नोएडा में प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुआ खुलासा!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
नोएडा। देश में पशुओं के खिलाफ बढ़ती क्रूरता के साथ-साथ पशु अधिकार कार्यकर्ताओं पर हो रही हिंसा एक गंभीर सामाजिक संकट का रूप लेती जा रही है। रविवार को नोएडा मीडिया क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पशु अधिकार कार्यकर्ता व फ़िल्ममेकर संक्षय बब्बर और लोकप्रिय टीवी सेलेब्रिटी व एनिमल एक्टिविस्ट करुणा ने इस चिंताजनक स्थिति पर विस्तार से अपनी बात रखी।
संक्षय बब्बर ने कहा कि हालिया सुप्रीम कोर्ट आदेशों की गलत व्याख्या के बाद ज़मीनी स्तर पर हालात और बिगड़े हैं। आवारा जानवरों को हटाने के नाम पर न केवल पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा है, बल्कि उन नागरिकों और फीडर्स को भी निशाना बनाया जा रहा है, जो मानवीय भावना के तहत बेज़ुबानों को भोजन उपलब्ध कराते हैं। स्ट्रीट डॉग फीडर्स के खिलाफ हिंसा, धमकी, झूठी शिकायतें और प्रशासनिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि महिलाओं, विशेषकर महिला फीडर्स, को सुनियोजित रूप से निशाना बनाया जा रहा है। जो छोटे-मोटे विवाद पहले कभी-कभार होते थे, वे अब भीड़ द्वारा हमले, सार्वजनिक उत्पीड़न, यौन हिंसा के प्रयास और गंभीर शारीरिक हमलों में बदल चुके हैं।
इस दौरान ऐसे कई पीड़ित भी मौजूद रहे, जिन्हें जानवरों को खाना खिलाने की वजह से हिंसा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। टीवी सेलेब्रिटी व पशु अधिकार कार्यकर्ता करुणा ने वर्चुअली जुड़कर अपने अनुभव और चिंता साझा की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, शिकायत पत्र, नोटिस, एफआईआर सहित कई दस्तावेज़ी सबूत भी मीडिया के सामने रखे गए।
बताया गया कि दिल्ली के हरिनगर इलाके में एक सामुदायिक कुत्ते की तलाश कर रही मां-बेटी के साथ मारपीट की गई, उन पर वस्तुएं फेंकी गईं और यौन हमले का प्रयास हुआ। गीता कॉलोनी में एक महिला और उसकी 17 वर्षीय बेटी पर लोहे की रॉड से हमला किया गया। वहीं यूपी के गाज़ियाबाद और मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी महिला फीडर्स और उनके परिवारों पर सार्वजनिक हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।
संक्षय बब्बर ने बताया कि देशभर में पशु क्रूरता का एक खतरनाक पैटर्न उभर रहा है, जिसमें कुत्तों की पीट-पीटकर हत्या, एसिड अटैक, सामूहिक ज़हर देना, पिल्लों को कुचलना और नसबंदी किए गए कुत्तों को मरने के लिए छोड़ देना जैसी घटनाएं शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़ मानसिकता, महिला फीडर्स के प्रति नफरत और अदालत के फैसलों की गलत व्याख्या इस हिंसा को और भड़का रही है।
एनिमल एक्टिविस्ट्स ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला न तो पशुओं को खाना खिलाने पर रोक लगाता है और न ही किसी प्रकार की हिंसा को वैध ठहराता है। इसके बावजूद कानून की गलत समझ के कारण हालात बिगड़ रहे हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और महिला फीडर्स को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की।
बब्बर ने कहा कि इस पूरे मुद्दे से जुड़े संवैधानिक, कानूनी और मानवीय पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है, ऐसे में ज़मीनी सच्चाई को सामने लाना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि पशु अधिकार कार्यकर्ताओं पर होने वाली अधिकांश हिंसक घटनाएं दर्ज ही नहीं हो पातीं, जिससे अपराधियों के हौसले और बढ़ जाते हैं।
