गोंडा- प्रखर राष्ट्रवादी वक्ता एवं सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि मनुस्मृति दुनिया का सबसे पुराना संहिताबद्ध ग्रंथ है। विश्व में जब शिक्षा नाम की चीज नहीं हुआ करती थी, तब मनुस्मृति में राजा और शासन, न्याय और दंड, स्त्री परिवार और उत्तराधिकार, वर्ण और सामाजिक व्यवस्था आदि के बारे में विस्तार से लिख दिया गया था, 2500 श्लोकों वाले इस मूल ग्रंथ में मुगल व अंग्रेज शासनकाल तथा आजादी के बाद कुछ वामपंथी टीकाकारों ने इसमें कुछ नए श्लोक शामिल करके इसे सर्वाधिक विवादित ग्रंथ बनाने का प्रयास किया। आज इस ग्रंथ को लेकर खुले मंच पर शास्त्रार्थ करने को कोई भी लेखक या विचारक तैयार नहीं है। वह शनिवार की देर रात एक स्थानीय पैरामेडिकल कालेज में आरएसएस द्वारा आयोजित हिंदू सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि विश्व के जिन 10 देशों से हमने वहां के प्रमुख तत्व लेकर भारतीय संविधान बनाया, उन्होंने उन तत्वों को कहां से प्राप्त किया था? इस प्रश्न पर क्या हमने कभी विचार किया? इन सभी तत्वों का उल्लेख सामाजिक गाइडबुक के रूप में काम करने वाले मनुस्मृति में विस्तार से है। दुनिया ने भारत का नकल किया। इसीलिए हम विश्वगुरू कहे जाते थे। उन्होंने कहा कि जननी जन्मभूमिश्च, यत्र नार्यस्तु पूज्यते, नारी तू नारायणी जैसे श्लाकों के माध्यम से महिला सम्मान की बात करने वाले ग्रंथ को कुछ सत्तालोलुप कलमकारों ने महिला विरोधी बताने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही सनातन धर्म में लड़कियों को भी न केवल शास्त्र पढ़ाया जाता था, बल्कि शस्त्र की भी शिक्षा दी जाती थी। आदि शंकराचार्य को शास्त्रार्थ में पराजित करने वाली मंडन मिश्र की पत्नी उभय भारती तथा कैकेय देश पर रावण द्वारा आक्रमण किए जाने पर राजा अश्वपति की बेटी कैकेयी द्वारा युद्धभूमि में रथ का कुशलतापूर्वक संचालन इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
श्री उपाध्याय ने कहा कि मनुस्मृति के 10वें अध्याय के 65वें श्लोक में ‘कर्मणा जायते जातिः’ का स्पष्ट उल्लेख है, जिसमें कर्म के आधार पर सामाजिक वर्ण व्यवस्था बनाने की बात कही गई है। भारतीय समाज में प्राचीन काल से ऐसा होता भी रहा है। राजा दशरथ और गुरु वशिष्ठ दोनों कश्यप गोत्र से होने के बावजूद कर्म के आधार पर उनकी जाति निर्धारित की गई। हस्तिनापुर (वर्तमान एशिया) के महाराज शान्तनु के निधन के बाद रानी सत्यवती (नाविक पुत्री) ने राज्य सिंहासन का कुशलतापूर्वक संचालन किया। सूतपुत्र होने के बावजूद कर्ण को न केवल कौरव सेना का प्रधान सेनापति बनाया गया, बल्कि दुर्योधन ने उसे अंग देश का राजा भी बनाया।
उन्होंने कहा कि विश्व के 6500 भाषाओ में लिखे गए 1100 धार्मिक ग्रंथों में से केवल हिंदू ग्रंथों में वसुधैव कुटुम्बकम् और सर्वे भवंतु सुखिनः की बात की गई है। कुछ लोग तो तलवार के बल पर अपने धर्म के विस्तार तथा उसे न मानने पर सिर कलम करने की बात करते हैं। आखिर दोनों में समानता कैसे हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत की भांति ही संविधान, सेना, सुप्रीम कोर्ट, सरकार जैसी सभी व्यवस्थाएं हमारे पड़ोसी देशों में भी हैं, किंतु वहां भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी लगातार बढ़ रही है, जबकि अगल-बगल के देशों में अल्पसंख्यक निरंतर घट रहे हैं। देश के 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में से आठ हिंदू विहीन हो चुके हैं। यदि हम नहीं चेते तो आने वाले समय में स्थिति भयावह होती जाएगी। इस मौके पर संघ के अवध प्रांत के सम्पर्क प्रमुख गंगा सिंह, विभाग प्रचारक प्रवीण, जिला प्रचारक सतीश, नगर प्रचारक अमित, डा. ओएन पांडेय, अलका पांडेय, पंकज अग्रवाल, अश्विनी शुक्ल, रणविजय सिंह, ज्योति पांडेय, धर्मेंद्र पांडेय, तारकेश्वर शुक्ल, अजिताभ दुबे, धीरज दूबे आदि मौजूद रहे।
