गौतमबुद्धनगर: कोहरे में नोएडा प्राधिकरण की घोर लापरवाही बनी जानलेवा, इंजीनियर की मौत से मचा हड़कंप!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
ग्रेटर नोएडा | बड़ी खबर
दो टूक:: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में हुआ दर्दनाक हादसा नोएडा प्राधिकरण की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। घने कोहरे के बीच बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के बने गहरे खाली प्लॉट ने एक होनहार सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान ले ली। यह हादसा न केवल एक परिवार की खुशियां छीन गया, बल्कि प्राधिकरण की कार्यशैली पर भी बड़े सवाल खड़े कर गया है।
मृतक की पहचान युवराज मेहता के रूप में हुई है, जो गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार, वह देर रात ऑफिस से घर लौट रहे थे। कोहरे के कारण सड़क पर दृश्यता बेहद कम थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि हादसे वाले स्थान पर न तो रिफ्लेक्टर लगाए गए थे, न चेतावनी बोर्ड और न ही कोई बैरिकेडिंग मौजूद थी।
सड़क बनी मौत का रास्ता
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क के किनारे बना करीब 70 फीट गहरा खाली प्लॉट लंबे समय से खतरा बना हुआ था। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन नोएडा प्राधिकरण ने आंखें मूंदे रखीं। घने कोहरे में युवराज की कार अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे फिसली और सीधे पानी से भरे गहरे प्लॉट में जा गिरी।
आखिरी फोन कॉल ने झकझोरा
हादसे के बाद युवराज काफी देर तक ठंडे पानी में फंसे रहे। उन्होंने अपने पिता राजकुमार मेहता को फोन कर आखिरी बार मदद मांगी और कहा,
“पापा, मैं पानी में फंसा हूं, बहुत ठंड लग रही है… जल्दी आ जाइए…”
लेकिन मदद समय पर नहीं पहुंच सकी और युवराज की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
मौके पर नहीं थे बुनियादी सुरक्षा इंतजाम
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि हादसे वाले स्थान पर पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, बावजूद इसके प्राधिकरण ने न तो रिफ्लेक्टर लगाए और न ही चेतावनी संकेतक। सड़क किनारे खुले गड्ढे और पानी से भरे प्लॉट प्रशासन की लापरवाही की गवाही दे रहे हैं।
हादसे के बाद जागा प्रशासन
घटना के बाद गुस्साए लोगों ने मौके पर प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण हरकत में आया और आनन-फानन में करीब 70 फीट गहरे प्लॉट को मलबा और कूड़ा डालकर भरवा दिया गया। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई पहले क्यों नहीं की गई, जब बार-बार शिकायतें की जा रही थीं।
परिजनों का दर्द, कार्रवाई की मांग
मृतक के पिता का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए गए होते तो उनके बेटे की जान बच सकती थी। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस के मुताबिक, घटना की सूचना 112 नंबर पर मिलने के बाद स्थानीय पुलिस, गोताखोर और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद कार को बाहर निकाला गया। थाना प्रभारी नॉलेज पार्क ने बताया कि परिजनों की शिकायत दर्ज कर ली गई है और जांच के बाद लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यह हादसा नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है और एक बार फिर साबित करता है कि सुरक्षा में की गई छोटी सी चूक भी किसी की जान ले सकती है।
