सोमवार, 2 नवंबर 2026

मऊ :जाति प्रमाणपत्र नहीं तो वोट नहीं,तुरैहा समाज ने बद्री नाथ के नेतृत्व में किया जोरदार प्रदर्शन।||Mau:No caste certificate, no vote. The Turaiah community, led by Badri Nath, staged a strong protest.||

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मऊ :
जाति प्रमाणपत्र नहीं तो वोट नहीं,तुरैहा समाज ने बद्री नाथ के नेतृत्व में किया जोरदार प्रदर्शन।
●मधुबन तहसील में जाति प्रमाणपत्र बनाने से इनकार का आरोप।
।।देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक :  मऊ जनपद के  मधुबन तहसील में तुरैहा समाज के जाति प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसको लेकर सोमवार को अखिल भारतीय पंचायत परिषद एवं घोसी नवनिर्माण मंच के तत्वावधान में तुरैहा समाज के लोगों ने बद्री नाथ के नेतृत्व में तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने 'जाति प्रमाणपत्र नहीं तो वोट नहीं' का नारा लगाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। उपजिलाधिकारी दीपक कुमार सिंह के क्षेत्र में मौजूद नहीं होने के कारण समाज के लोगों ने तहसीलदार अशोक कुमार कुशवाहा को मांग पत्र सौंपकर जाति प्रमाणपत्र जारी कराने के लिए स्पष्ट आदेश देने की मांग की।
अखिल भारतीय पंचायत परिषद के मीडिया सलाहकार बद्री नाथ ने कहा कि तुरैहा जाति उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जाति सूची में क्रम संख्या-66 पर दर्ज है। प्रदेश के अन्य जिलों में समाज के लोगों के जाति प्रमाणपत्र बनाए जा रहे हैं, लेकिन मऊ जिले की मधुबन तहसील में प्रमाणपत्र बनाने से इनकार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आवेदन करने के बावजूद लोगों के प्रार्थना पत्र वापस कर दिए जा रहे हैं, जिससे समाज के बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जाति प्रमाणपत्र नहीं बनने के कारण बच्चे छात्रवृत्ति, छात्रावास, सरकारी नौकरियों में आरक्षण, प्रवेश परीक्षाओं में छूट और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। इससे बच्चों की शिक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कई अभिभावकों ने अपने बच्चों के प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया, लेकिन तहसील से आवेदन वापस कर दिए गए, जिससे उनमें निराशा और आक्रोश है।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब तुरैहा समाज का जाति प्रमाणपत्र बलिया, देवरिया और प्रदेश के अन्य जिलों में बनाया जा रहा है तो मधुबन तहसील में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है? समाज के लोगों ने अन्य जिलों में जारी प्रमाणपत्रों के साक्ष्य भी अपने मांग पत्र के साथ संलग्न किए। उन्होंने इसे दोहरा मापदंड बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
समाज के लोगों ने मांग की कि उपजिलाधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तुरैहा समाज के पात्र लोगों का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र जारी करने के संबंध में स्पष्ट निर्देश दें, ताकि बच्चों को शिक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो समाज व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए है।
इस अवसर पर दिनेश तुरहा, धर्मेंद्र, कतवारू, हरिंद्र, विनोद, छोटेलाल, शंकर, रेश्मा देवी, पूनम देवी, आशा, रागिनी, गुड़िया, निर्मला सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।