बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

गौतमबुद्धनगर: यमुना प्राधिकरण पर किसानों पर लाठीचार्ज का आरोप, बीसी प्रधान ने की न्यायिक जांच की मांग; बोले—किसानों की आवाज दबाना बर्दाश्त नहीं!!

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गौतमबुद्धनगर: यमुना प्राधिकरण पर किसानों पर लाठीचार्ज का आरोप, बीसी प्रधान ने की न्यायिक जांच की मांग; बोले—किसानों की आवाज दबाना बर्दाश्त नहीं!!
 वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//ग्रेटर नोएडा।यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में किसानों की लंबित मांगों को लेकर प्रस्तावित शांतिपूर्ण महापड़ाव के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने कड़ी नाराजगी जताई है। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव एवं वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता चौधरी बीसी प्रधान बरौला ने पुलिस पर किसानों, महिलाओं, बुजुर्गों और आंदोलन का समर्थन कर रहे अधिवक्ताओं के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों की जायज मांगों को सुनने के बजाय बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है।

चौधरी बीसी प्रधान के मुताबिक, 21 अक्टूबर 2026 को किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसान अपनी वर्षों से लंबित मांगों को लेकर यमुना प्राधिकरण पर शांतिपूर्ण महापड़ाव देने जा रहे थे। उनका कहना है कि किसान गांधीवादी तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन इस दौरान भारी पुलिस बल की कार्रवाई में किसानों को परेशान किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से वार्ता का रास्ता अपनाने के बजाय बल प्रयोग किया गया, जिससे किसानों में रोष व्याप्त है।

महिलाओं और बुजुर्ग किसानों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप

बीसी प्रधान ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान महिला किसानों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें घसीटकर बसों में बैठाया गया। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल बुजुर्ग और निहत्थे किसानों पर लाठियां चलाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसके अलावा, प्रदर्शन की वीडियो बना रहे युवाओं के मोबाइल फोन छीने जाने तथा किसानों के समर्थन में पहुंचे अधिवक्ताओं के साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने वाले किसानों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए। यदि किसी पक्ष को लेकर कोई समस्या थी, तो उसका समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जा सकता था। किसानों की आवाज सुनने के बजाय उनके खिलाफ सख्ती करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
किसानों की तीन प्रमुख मांगें

भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने किसानों की लंबित समस्याओं का समाधान कराने पर जोर देते हुए तीन प्रमुख मांगें उठाई हैं। इनमें किसानों को 10 प्रतिशत विकसित भूखंड आवंटित करना, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देना तथा किसानों की आबादी से जुड़े मामलों का पूर्ण निस्तारण करना शामिल है।

चौधरी बीसी प्रधान ने कहा कि किसान लंबे समय से अपने अधिकारों और मुआवजे से जुड़े मामलों के समाधान की मांग कर रहे हैं। ऐसे में प्राधिकरण और प्रशासन को किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए ठोस निर्णय लेना चाहिए, ताकि उन्हें बार-बार आंदोलन का रास्ता न अपनाना पड़े।

भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने रखीं चार मांगें

संगठन की ओर से इस पूरे मामले में चार प्रमुख मांगें उठाई गई हैं। इनमें घटनाक्रम की न्यायिक जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, घायल किसानों और अधिवक्ताओं को समुचित इलाज तथा मुआवजा उपलब्ध कराने, यमुना प्राधिकरण के सीईओ से तत्काल वार्ता कराने और हिरासत में लिए गए सभी किसानों को रिहा करने की मांग शामिल है।

बीसी प्रधान ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान संवाद और सहमति के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए किसानों की मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।
 किसान, मजदूर और सामाजिक संगठनों से एकजुट होने की अपील

चौधरी बीसी प्रधान बरौला ने घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए किसान, मजदूर, खाप, छात्र और विभिन्न सामाजिक संगठनों से किसानों के मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहना चाहिए।

उन्होंने कहा, **“किसान डरने वाला नहीं है और न ही अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे हटने वाला है। किसानों की समस्याओं का समाधान लाठी के दम पर नहीं, बल्कि बातचीत और न्यायपूर्ण निर्णयों से होना चाहिए।”**

भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने स्पष्ट किया कि संगठन किसानों की लंबित मांगों के समाधान, घायल लोगों को न्याय दिलाने और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने के लिए अपनी आवाज उठाता रहेगा।।