गौतमबुद्धनगर: आवारा कुत्तों के हमलों पर प्रशासन की जवाबदेही तय हो, नागरिकों की सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं: अधिवक्ता रणपाल अवाना
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता, नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की उठाई मांग
दो टूक//नोएडा। शहर और आसपास के क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रणपाल अवाना ने प्रशासन एवं संबंधित स्थानीय निकायों से प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इस मामले में लापरवाही बरतने वाले विभागों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
अधिवक्ता रणपाल अवाना ने कहा कि आवारा कुत्तों के हमलों की समस्या का समाधान केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि ठोस कार्ययोजना, नियमित निगरानी और जिम्मेदार विभागों के बीच बेहतर समन्वय से संभव है। इसके लिए उन क्षेत्रों की पहचान की जानी चाहिए, जहां कुत्तों के काटने की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। ऐसे स्थानों पर विशेष निगरानी रखने के साथ शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
नागरिकों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी
रणपाल अवाना ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को भयमुक्त होकर आवागमन करने का अवसर मिलना चाहिए। बच्चों का स्कूल जाना, बुजुर्गों का सुबह-शाम टहलना और आम नागरिकों का अपने दैनिक कार्यों के लिए घर से बाहर निकलना सामान्य जीवन का हिस्सा है। ऐसे में आवारा कुत्तों के हमलों का भय लोगों की दिनचर्या और सुरक्षा को प्रभावित करता है। प्रशासन को इस समस्या की गंभीरता समझते हुए स्थायी और व्यावहारिक समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।
उन्होंने संबंधित विभागों से मांग की कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए पशु जन्म नियंत्रण नियमों के अनुरूप नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण अभियान प्रभावी ढंग से चलाया जाए। इसके साथ ही कुत्तों के काटने की घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया, प्रभावित लोगों को चिकित्सा सहायता और रेबीज से बचाव के लिए आवश्यक उपचार की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर दिया जोर
अधिवक्ता अवाना ने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 के तहत निर्धारित व्यवस्थाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होना चाहिए, ताकि नागरिकों की सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच कानून के अनुरूप संतुलन स्थापित किया जा सके।
उन्होंने सार्वजनिक एवं संस्थागत परिसरों की सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया। उनके अनुसार, स्कूलों, अस्पतालों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसे स्थानों पर सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए। ऐसे परिसरों में आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारी सौंपना और कार्रवाई की नियमित समीक्षा करना आवश्यक है।
शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई तो तय हो जवाबदेही
रणपाल अवाना ने प्रशासन से मांग की कि कुत्तों के हमलों से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर उनकी सूची तैयार की जाए। शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी घटना के बाद पीड़ित परिवार को विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में रेबीज से बचाव के लिए आवश्यक उपचार की उपलब्धता भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी क्षेत्र में लगातार घटनाएं सामने आती हैं और शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं करते, तो मामले की समीक्षा कर नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं, बल्कि समस्या का समाधान करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की आशंका को कम करना होना चाहिए।
पशु कल्याण और जनसुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी
अधिवक्ता रणपाल अवाना ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को किसी व्यक्ति, संस्था या पशु प्रेमी के प्रति दुर्भावना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, कानून का पालन कराना और आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्या का मानवीय एवं स्थायी समाधान तलाशना है।
उन्होंने कहा कि पशु कल्याण से संबंधित नियमों का सम्मान करते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे आम नागरिकों को सुरक्षा मिले और संबंधित कानूनों का भी उचित पालन हो। इसके लिए प्रशासन, स्थानीय निकायों, स्वास्थ्य विभाग और पशु कल्याण से जुड़े संगठनों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।
अधिवक्ता रणपाल अवाना ने प्रशासन से अपील की कि नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर विषय को प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए और उसके क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा हो। उनका कहना है कि प्रभावी निगरानी, त्वरित शिकायत निस्तारण और जवाबदेही सुनिश्चित करके ही इस समस्या पर अंकुश लगाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
रणपाल अवाना सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता होने के साथ-साथ कानूनी विकास मंच के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। कानून और जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी यह मांग सार्वजनिक सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और कानूनी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को सामने रखती है।।
