शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

लखनऊ : रीढ़ में पांच ट्यूमर का जटिल ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने लौटाई 27 वर्षीय युवती के पैरों की ताकत।||Lucknow: Doctors restored the strength of a 27-year-old woman's legs after performing a complex operation on five spinal tumors.||

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लखनऊ : 
रीढ़ में पांच ट्यूमर का जटिल ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने लौटाई 27 वर्षीय युवती के पैरों की ताकत।
●तीन महीने से चलने में असमर्थ मरीज अब सहारे से चलने लगी।
दो टूक : कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान, लखनऊ के न्यूरोसर्जरी विभाग की टीम ने जटिल सर्जरी कर 27 वर्षीय युवती को नई जिंदगी की उम्मीद दी है। रीढ़ की नसों में बने पांच ट्यूमर निकालने के बाद मरीज के पैरों में दोबारा ताकत लौटने लगी है और अब वह थोड़े सहारे से चलने लगी हैं। खास बात यह है कि दोनों सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क की गईं।
विस्तार :
डॉ० वरुण विजय ने बताया कि मथुरा निवासी 27 वर्षीय युवती पिछले तीन महीने से पैरों में कमजोरी के कारण चलने-फिरने में असमर्थ थीं। उन्होंने कई डॉक्टरों से परामर्श लिया, लेकिन सर्जरी के बाद भी पैरों की ताकत वापस आने की संभावना बेहद कम बताई गई। इसके बाद मरीज ने कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विजेन्द्र कुमार से संपर्क किया। उन्होंने मरीज को भरोसा दिलाते हुए दो चरणों में जटिल सर्जरी करने की योजना बनाई।
प्रो. विजेन्द्र कुमार के अनुसार, मरीज एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थीं, जिसमें शरीर की कई नसों में ट्यूमर बन जाते हैं। इस मामले में एक ट्यूमर रीढ़ की हड्डी से आगे बढ़कर छाती तक पहुंच गया था और फेफड़ों पर दबाव डाल रहा था। इसके अलावा चार अन्य ट्यूमर रीढ़ की नसों के भीतर मौजूद थे। इन ट्यूमर के कारण नसों पर दबाव पड़ रहा था, जिससे मरीज के शरीर में कमजोरी बढ़ गई थी और वह चलने में असमर्थ हो गई थीं।
डॉक्टरों ने पांचों ट्यूमर निकालने के लिए दो चरणों में ऑपरेशन किया। पहली सर्जरी में रीढ़ और छाती तक फैले ट्यूमर को निकाला गया। करीब सात घंटे तक चले इस ऑपरेशन के कुछ दिन बाद दूसरी सर्जरी की गई, जो लगभग छह घंटे चली। इस दौरान पैरों की नसों पर दबाव डाल रहे चार अन्य ट्यूमर भी सफलतापूर्वक निकाल दिए गए।
इस जटिल ऑपरेशन में न्यूरोसर्जरी टीम के डॉ. अमित कुमार उपाध्याय और डॉ. आशीष मिश्रा शामिल रहे। वहीं, एनेस्थीसिया टीम में डॉ. असीम रशीद और डॉ. अर्चना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वरुण विजय ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज का पूरा इलाज निःशुल्क किया गया। निजी अस्पतालों में इस तरह की दोनों सर्जरी पर लगभग छह से सात लाख रुपये तक खर्च हो सकता है।
फिलहाल मरीज की हालत में सुधार हो रहा है। वह थोड़े सहारे से चलने लगी हैं और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की योजना है। संस्थान के निदेशक प्रो. एम.एल.बी. भट्ट ने इस जटिल सर्जरी में सफलता के लिए न्यूरोसर्जरी टीम को बधाई दी।