लखनऊ :
गुरु के स्पर्श से प्रतिभा को निखारने का संदेश।।
पारस’ अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ।।
दो टूक : लखनऊ में शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में कला दीर्घा, अंतरराष्ट्रीय दृश्य कला पत्रिका एवं कला स्रोत कलावीथिका के संयुक्त तत्वावधान में ‘पारस’ अंतरराष्ट्रीय दृश्यकला प्रदर्शनी का मंगलवार को अलीगंज स्थित कला स्रोत कलावीथिका में भव्य शुभारंभ हुआ। साहित्यकार, चिंतक एवं सौंदर्यशास्त्री आचार्य सूर्य प्रसाद दीक्षित ने दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
उद्घाटन अवसर पर आचार्य सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि जहां शब्दों की सीमाएं समाप्त होती हैं, वहां तूलिका, रंग, रेखा और रूप अपनी अभिव्यक्ति शुरू करते हैं। सभी कलाएं एक-दूसरे से संवाद करती हैं और मानव संवेदनाओं को व्यापक बनाती हैं। उन्होंने कला दीर्घा की प्रकाशक डॉ. लीना मिश्र एवं संपादक डॉ. अवधेश मिश्र द्वारा कला के दस्तावेजीकरण और कलाकारों को व्यापक मंच देने के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर आयोजित ‘पारस’ प्रदर्शनी गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सृजनात्मक समर्पण का प्रतीक है। ‘पारस’ भारतीय सांस्कृतिक चेतना में उस रूपांतरणकारी शक्ति का प्रतीक है, जिसके स्पर्श से साधारण असाधारण और लौह स्वर्ण में बदल जाता है। इसी भाव में गुरु वह पारस है, जो ज्ञान, अनुभव, अनुशासन और संस्कार से शिष्य की प्रतिभा को निखारता है।
तीन देशों के 48 कलाकारों की कलाकृतियां बनीं आकर्षण
प्रदर्शनी के समन्वयक डॉ. अनीता वर्मा एवं श्री सुमित कुमार के संयोजन में आयोजित इस आयोजन में 48 कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। चित्रकला, छापाचित्र, सिरामिक, टेक्सटाइल कोलाज, छायाचित्र और बुनाई सहित विभिन्न माध्यमों की कलाकृतियां प्रदर्शनी को बहुआयामी स्वरूप दे रही हैं।
‘पारस’ की खासियत यह है कि इसमें भारत के साथ बांग्लादेश और श्रीलंका के कलाकार भी शामिल हैं। तीन देशों के कलाकारों की भागीदारी ने प्रदर्शनी को दक्षिण एशियाई सांस्कृतिक संवाद का स्वरूप दिया है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और भौगोलिक सीमाओं के बावजूद गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता ने कलाकारों को एक साझा भावभूमि से जोड़ा है।
कला जगत की हस्तियों का हुआ सम्मान
उद्घाटन समारोह में आचार्य राजेंद्र प्रसाद, आचार्य आलोक कुमार, आचार्य रविकांत पांडेय, कला दीर्घा के संपादक डॉ. अवधेश मिश्र तथा प्रदर्शनी के समन्वयक डॉ. अनीता वर्मा और श्री सुमित कुमार को मुख्य अतिथि आचार्य सूर्य प्रसाद दीक्षित, कला स्रोत कलावीथिका की निदेशक श्रीमती मानसी डिडवानिया एवं डॉ. लीना मिश्र ने सम्मानित किया। इस दौरान डॉ. लीना मिश्र ने श्रीमती मानसी डिडवानिया को पुष्प-पात्र भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में आचार्य विभावरी सिंह, श्री अमरनाथ गौड़, श्री सुशील कनौजिया समेत बड़ी संख्या में कलाकार, कला-साधक, कला-प्रेमी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। उद्घाटन के दौरान कलाकारों और दर्शकों के बीच समकालीन कला की प्रवृत्तियों को लेकर सार्थक संवाद भी हुआ।
2 और 3 सितंबर को आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी
कला दीर्घा अंतरराष्ट्रीय दृश्य कला पत्रिका वर्ष 2000 से भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय दृश्य कलाओं के दस्तावेजीकरण, संवर्धन और प्रसार के लिए सक्रिय है। ‘हौसला’, ‘वत्सल’, ‘समर्पण’, ‘ढिबरी’, ‘बसंत’, ‘नास्टैल्जिया.25’, ‘चौपाल’, ‘हुलास’, ‘मड़ई’, ‘अरघान’ और ‘नैवेद्य’ जैसी प्रदर्शनियों के बाद ‘पारस’ को इसी कला-यात्रा की महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया।
‘पारस’ प्रदर्शनी 2 एवं 3 सितंबर को दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक कला स्रोत कलावीथिका, अलीगंज, लखनऊ में कला-प्रेमियों एवं आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी।
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