मंगलवार, 8 सितंबर 2026

लखनऊ :एक दशक से सीने में फंसा रहा ड्रिल बिट, ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने निकाला।।Lucknow:A drill bit had been stuck in the chest for a decade; doctors removed it through surgery.||

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लखनऊ :
एक दशक से सीने में फंसा रहा ड्रिल बिट, ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने निकाला।।
सड़क हादसे के बाद बांह के ऑपरेशन के दौरान शरीर में रह गया था ड्रिल बिट।
।।डी एस शास्त्री।।
दो टूक : राजधानी लखनऊ के एसजीपीजीआई एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने एक बेहद असामान्य और चुनौतीपूर्ण मामले में मरीज के सीने में करीब एक दशक से फंसे ड्रिल बिट को सफलतापूर्वक निकालकर उसे लंबे समय से चले आ रहे सीने के दर्द से राहत दिलाई। लंबे समय तक शरीर में मौजूद रही इस विदेशी धातु की वस्तु का सफल ऑपरेशन विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम ने किया।
विस्तार :
जानकारी कैसे मुताबिक जनपद कुशीनगर निवासी 53 वर्षीय अब्दुल कादिर वर्ष 2014 में सड़क दुर्घटना में घायल हुए थे। हादसे में उनकी दाहिनी बांह की ह्यूमरस हड्डी में फ्रैक्चर हुआ था। इसके बाद वर्ष 2015 में उनका उपचार किया गया। बांह की हड्डी से संबंधित उपचार और ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल हुआ ड्रिल बिट का एक हिस्सा मरीज के शरीर में ही रह गया था जो करीब 11 वर्षों तक सीने में मौजूद रहा।
इस दौरान मरीज सामान्य जीवन जीता रहा, लेकिन उसके सीने के दाहिने हिस्से में लगातार दर्द बना रहा। परेशानी बढ़ने पर वह इलाज के लिए एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचा। जांच के दौरान चिकित्सकों को सीने में धातु की विदेशी वस्तु मौजूद होने का पता चला। लंबे समय से शरीर के अंदर मौजूद इस धातु के टुकड़े को निकालना चिकित्सकों के लिए चुनौतीपूर्ण था। विशेषज्ञों ने विस्तृत जांच के बाद मल्टीडिसिप्लिनरी टीम के साथ उपचार की योजना तैयार की और सावधानीपूर्वक प्रक्रिया के जरिए ड्रिल बिट को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया।
इस जटिल उपचार को प्रो. अमित कुमार सिंह, ट्रॉमा सर्जरी; डॉ. अमित कुमार, एडिशनल प्रोफेसर, ऑर्थोपेडिक्स; डॉ. आदित्य एवं डॉ. वरुण गुप्ता, सीनियर रेजिडेंट, ट्रॉमा सर्जरी तथा डॉ. वंश, एडिशनल प्रोफेसर, एनेस्थीसिया की टीम ने अंजाम दिया।
डॉक्टरों के अनुसार, यह मामला दर्शाता है कि पुराने और जटिल ट्रॉमा मामलों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञता और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय से बेहद चुनौतीपूर्ण स्थितियों का भी सफल उपचार किया जा सकता है। ड्रिल बिट निकाले जाने के बाद मरीज को लंबे समय से हो रहे सीने के दर्द से राहत मिली।