मंगलवार, 1 सितंबर 2026

स्लीपर बस गैंगरेप केस में बड़ा मोड़! नोएडा में ट्रेवल एजेंसी का ऑफिस बंद, बोर्ड-बैनर हटने से उठे कई सवाल!!

शेयर करें:

स्लीपर बस गैंगरेप केस में बड़ा मोड़! नोएडा में ट्रेवल एजेंसी का ऑफिस बंद, बोर्ड-बैनर हटने से उठे कई सवाल!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

16 वर्षीय छात्रा से 4 अगस्त की रात चलती बस में कथित गैंगरेप के आरोप, चालक-कंडक्टर गिरफ्तार; अब सेक्टर-44 के छलेरा में एजेंसी का दफ्तर बंद मिलने से बढ़ी हलचल

दो टूक//नोएडा/नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए सवाल सामने आ रहे हैं। दिल्ली पुलिस द्वारा मामले में बस चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार किए जाने के बाद अब नोएडा के सेक्टर-44 स्थित छलेरा गांव से जुड़ा एक नया घटनाक्रम सामने आया है।

मामले से जुड़ी बताई जा रही विश्वनाथ टूर एंड ट्रेवल एजेंसी का कार्यालय बंद मिला है। कार्यालय के बाहर लगे बोर्ड और होर्डिंग भी हटा दिए गए हैं। हालांकि, कार्यालय बंद करने और बोर्ड-बैनर हटाने के पीछे की आधिकारिक वजह अभी सामने नहीं आई है।

4 अगस्त की रात सामने आई थी कथित वारदात

जानकारी के मुताबिक छात्रा उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की रहने वाली है। बताया जा रहा है कि वह पढ़ाई को लेकर मां की डांट से नाराज होकर घर से निकली थी और नोएडा के सेक्टर-63 में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास जाना चाहती थी।

तेज बारिश और अंधेरा होने के कारण रास्ता भटकने के बाद वह ग्रेटर नोएडा के परी चौक पहुंची। यहां उसने नोएडा सेक्टर-63 जाने के लिए एक स्लीपर बस को रुकवाया। आरोप है कि बस के कंडक्टर ने उसे बस के सेक्टर-63 जाने की बात बताई, जिसके बाद वह बस में सवार हो गई।

बस में छात्रा के अलावा चालक और कंडक्टर होने का दावा

पुलिस को दिए गए बयान के मुताबिक बस में उस समय छात्रा के अलावा चालक और कंडक्टर ही मौजूद थे। आरोप है कि बस चलने के बाद कंडक्टर ने छात्रा के साथ अश्लील हरकत की। विरोध करने पर चालक और कंडक्टर ने कथित तौर पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

छात्रा ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई।

बताया गया है कि बस परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट क्षेत्र तक करीब 47 किलोमीटर चली। बस की खिड़कियों पर पर्दे लगे होने के कारण बाहर से अंदर देख पाना मुश्किल बताया जा रहा है।

कश्मीरी गेट के पास उतारकर आरोपी फरार

दिल्ली पहुंचने के बाद आरोपियों ने छात्रा को कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर उतार दिया। इसके बाद छात्रा कश्मीरी गेट थाने पहुंची और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।

पुलिस ने छात्रा का मेडिकल परीक्षण कराने के साथ उसका बयान दर्ज किया और मामले की जांच शुरू की।

CCTV और तकनीकी साक्ष्यों से आरोपियों तक पहुंची पुलिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने विशेष टीम गठित की। पुलिस ने रास्ते में लगे CCTV कैमरों की फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से बस की पहचान की। इसके बाद चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप को तिमारपुर स्थित पार्किंग से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई।

पुलिस ने कथित वारदात में इस्तेमाल बस को भी अपने कब्जे में लिया है।

वर्कशॉप से लौट रही थी बस

जांच से जुड़े सामने आए विवरण के अनुसार बस में तकनीकी खराबी आने के बाद उसे ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित वर्कशॉप में मरम्मत के लिए ले जाया गया था। मरम्मत के बाद चालक और कंडक्टर बस को वापस उत्तरी दिल्ली के तिमारपुर स्थित पार्किंग की ओर ले जा रहे थे। इसी दौरान छात्रा परी चौक से बस में सवार हुई थी।

नोएडा पुलिस के रुख से भी मामले में बढ़ी पेचीदगी

मामले में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बीच नोएडा पुलिस की ओर से घटना की जानकारी और स्थानीय स्तर पर सूचना साझा किए जाने को लेकर अलग रुख सामने आने की बात कही जा रही है। इससे घटना की वास्तविक लोकेशन और दोनों पुलिस इकाइयों के बीच सूचना के आदान-प्रदान को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि कथित वारदात वास्तव में बस के किस क्षेत्र में हुई और पूरे घटनाक्रम के दौरान बस किन-किन स्थानों से होकर गुजरी।

अब ट्रेवल एजेंसी का दफ्तर बंद, बोर्ड-बैनर भी हटे

इस बीच सेक्टर-44 के छलेरा गांव में स्थित विश्वनाथ टूर एंड ट्रेवल के कार्यालय का बंद मिलना मामले को और चर्चा में ले आया है। कार्यालय के बाहर लगे बोर्ड, होर्डिंग और बैनर भी हटे हुए बताए जा रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कार्यालय अचानक क्यों बंद किया गया और वहां लगे पहचान संबंधी बोर्ड-बैनर किस वजह से हटाए गए। हालांकि, इन सवालों का जवाब फिलहाल आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है।

स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

घटना ने स्लीपर बसों में महिलाओं और नाबालिग यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बसों में CCTV, GPS, पैनिक बटन, ड्राइवर-कंडक्टर का सत्यापन और निर्धारित मार्ग पर निगरानी जैसे सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल पुलिस की जांच में घटना की पूरी परिस्थितियों, बस के रूट, कथित वारदात की वास्तविक लोकेशन और आरोपियों की भूमिका से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया जाना बाकी है।

नाबालिग से जुड़े इस गंभीर मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 4 अगस्त की रात बस के भीतर वास्तव में क्या हुआ और नोएडा से दिल्ली तक चले इस पूरे घटनाक्रम की पूरी सच्चाई जांच में कब सामने आती है।