गुरुवार, 10 सितंबर 2026

लखनऊ : D M के आश्वासन पर 22 दिन बाद समाप्त हुआ किसानों का धरना।||Lucknow: Farmers' protest ends after 22 days on DM's assurance.||

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लखनऊ : 
DM के आश्वासन पर 22 दिन बाद समाप्त हुआ किसानों का धरना।
●कुबहरा-कमालपुर बिचलिका के बीच 700 मीटर कच्ची सड़क का होगा पुन:डामरीकरण।
 दो टूक : राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र नगराम क्षेत्र के कुबहरा-कमालपुर बिचलिका के बीच करीब 700 मीटर कच्चे मार्ग के डामरीकरण की मांग को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के नेतृत्व में 22 दिनों से चल रहा किसानों का धरना बुधवार को जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि तय समय में सड़क निर्माण नहीं हुआ तो फिर बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
विस्तार
बुधवार को बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण धरना स्थल पर जुटे थे और पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता कार्यालय का घेराव करने की तैयारी में थे। इसकी भनक लगते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। एसडीएम आकाश सिंह और नगराम थाना प्रभारी अंजनी कुमार सिंह धरना स्थल पहुंचे और किसान नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर से वार्ता के लिए भेजा।
प्रदेश अध्यक्ष प्रताप बहादुर, प्रदेश महासचिव दिनेश यादव, मंडल उपाध्यक्ष राजेंद्र यादव, जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार और प्रदेश सचिव रत्नेश प्रधान ने जिला वन अधिकारी व पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता की मौजूदगी में डीएम से वार्ता की। जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया कि कागजी प्रक्रिया जल्द पूरी कर अधूरी सड़क का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को तत्काल कच्चे मार्ग के गड्ढे भरकर आवागमन सुचारु कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद एसडीएम आकाश सिंह, एसीपी आरके सिंह, रेंजर सुरभि श्रीवास्तव और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के साथ धरना स्थल पहुंचे। एसडीएम ने किसानों को डीएम से हुई वार्ता की जानकारी देते हुए बताया कि तत्काल ईंट-भट्ठे से अद्धा-रोड़ा मंगाकर और ऊपर से राबिश डालकर सड़क के गड्ढे भरवाए जाएंगे, ताकि ग्रामीणों का आवागमन बाधित न हो। इसके साथ ही सड़क के डामरीकरण की प्रक्रिया भी जल्द पूरी कराने का आश्वासन दिया गया।
प्रशासन के भरोसे के बाद किसान नेताओं ने ग्रामीणों से वार्ता कर 22 दिन से चल रहा धरना समाप्त करने की घोषणा की। संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष योगेंद्र कुमार ने कहा कि यदि निर्धारित समय में सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो किसान और ग्रामीण दोबारा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।